
- डॉ अरुण कुमार मयंक –
बिहार कांग्रेस के भीतर उठी नाराज़गी अब सड़कों से निकलकर दिल्ली के दरवाज़े तक पहुंचने वाली है! नालंदा में समर्पित कांग्रेसजनों की बैठक के बाद 8 सितंबर को दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय इंदिरा भवन (AICC) पर धरना-प्रदर्शन का ऐलान किया गया है। “बिहार प्रभारी कृष्णा अल्लावरू और बिहार अध्यक्ष राजेश राम हटाओ” के नारे के साथ जिलेवार कांग्रेस कार्यकर्ताओं को दिल्ली कूच का आह्वान किया गया है। संगठन सृजन, जिलाध्यक्षों के मनोनयन, टिकट वितरण और कथित उपेक्षा को लेकर उठे सवालों ने बिहार कांग्रेस के भीतर चल रही खींचतान को खुलकर सामने ला दिया है। अब सवाल सिर्फ नाराज़गी का नहीं, बल्कि बिहार कांग्रेस के संगठनात्मक भविष्य का है!
पटना/बिहारशरीफ डेस्क। बिहार कांग्रेस में संगठनात्मक फैसलों को लेकर असंतोष अब खुली राजनीतिक मुहिम का रूप लेता दिख रहा है। नालंदा जिला में समर्पित कांग्रेसजनों की कोर कमिटी की बैठक में 8 सितंबर को नई दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय इंदिरा भवन (AICC) पर धरना-प्रदर्शन करने का निर्णय लिया गया। चंडी के पूर्व विधायक अनील सिंह, राजीव कुमार मुन्ना और किशोर कुमार ने बताया कि “समर्पित कांग्रेसजन” अभियान के तहत विभिन्न जिलों में आपसी परिचर्चा और विचार-विमर्श का दौर चल रहा है। तीसरे चरण में 20 अगस्त को सहरसा एवं मधेपुरा, 21 अगस्त को सुपौल और 24 अगस्त को भभुआ (कैमूर) में कार्यक्रम निर्धारित है। अन्य जिलों की तिथियों की घोषणा बाद में की जाएगी।
नालंदा से दिल्ली तक सियासी हुंकार:
बिहारशरीफ में बुधवार को आयोजित परिचर्चा में पूर्व विधायक अनील सिंह ने कहा कि विभिन्न जिलों के कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ कथित उपेक्षा और भेदभाव के मामलों को लेकर राष्ट्रीय नेतृत्व का ध्यान आकर्षित करने के लिए 8 सितंबर को दिल्ली में धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। उनका कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य संगठन को मजबूत करना और कार्यकर्ताओं की समस्याओं का समाधान कराना है।
जिलाध्यक्ष मनोनयन पर सबसे बड़ा सवाल:
परिचर्चा में संगठन सृजन के तहत जिलाध्यक्षों के मनोनयन को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए। समर्पित कांग्रेसजनों का आरोप है कि कई जिलों में संघर्षरत और पुराने कार्यकर्ताओं के बीच निराशा और असंतोष पैदा हुआ है। बैठक में आरोप लगाया गया कि दिल्ली दरबार के “जुगाड़ तंत्र सिंडीकेट” से जुड़े लोगों तथा कुछ सफेदपोश नेताओं ने अपना वर्चस्व बनाए रखने के लिए जिलाध्यक्ष पद हासिल किए। वक्ताओं ने संगठन सृजन के तहत जिलाध्यक्ष मनोनयन की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए बिहार कांग्रेस प्रभारी, सह प्रभारी और प्रदेश अध्यक्ष पर AICC पर्यवेक्षक तथा राष्ट्रीय महासचिव संगठन को कथित रूप से गुमराह करने का आरोप लगाया।हालांकि ये सभी आरोप बैठक में मौजूद कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं द्वारा लगाए गए हैं; संबंधित नेताओं का पक्ष अलग से सामने आना बाकी है।
‘हटाओ और बचाओ’ के नारे पर प्रस्ताव:
बैठक में समर्पित कांग्रेसजनों ने राष्ट्रीय नेतृत्व का ध्यान बिहार कांग्रेस की ओर आकर्षित करने तथा बिहार कांग्रेस प्रभारी, सह प्रभारी और बिहार प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष को अविलंब हटाने की मांग वाला प्रस्ताव पारित किया। संयोजक जमाल अहमद भल्लू ने कहा कि बिहार कांग्रेस में संशय और अनिश्चितता के माहौल में जिलेवार संगठन मजबूत नहीं हो सकता। उनके अनुसार समर्पित कांग्रेसजनों की आंतरिक पीड़ा दूर करने के लिए एकजुट होकर 8 सितंबर को दिल्ली पहुंचना जरूरी है, ताकि धरना-प्रदर्शन के माध्यम से राष्ट्रीय नेतृत्व का ध्यान आकृष्ट कराया जा सके।
टिकट से लेकर संगठन चुनाव तक, कई मोर्चों पर सवाल:
संयोजक नागेन्द्र पासवान विकल ने कहा कि जिन समर्पित और संघर्षरत कार्यकर्ताओं को कांग्रेस पार्टी की ओर से चुनाव लड़ने का टिकट नहीं मिला, उन्हें संगठन में जिलाध्यक्ष बनने का अवसर मिलना चाहिए था। उन्होंने आरोप लगाया कि संगठन सृजन के नाम पर बिहार और दिल्ली में बैठे “सिंडीकेट” के सदस्यों ने अपने-अपने जिलाध्यक्ष मनोनीत करवा लिए, जो उनके मुताबिक बिहार कांग्रेस के हित में न्यायोचित नहीं है।
वहीं छत्रपति यादव, पूर्व विधायक, ने बिहार प्रदेश कांग्रेस को मौजूदा दौर में “संक्रमणकाल” से गुजरता हुआ बताया। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं को सतर्क रहने की जरूरत है और संगठन को मजबूत करने के लिए कांग्रेस संविधान के अनुरूप प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि जब बिहार कांग्रेस में सदस्यता 2027 तक लागू है और प्रदेश डेलीगेट एवं जिला डेलीगेट निर्वाचित हैं, तो संगठन चुनाव में कांग्रेस संविधान को लागू क्यों नहीं किया गया?
2025 के टिकट बंटवारे पर भी उठी आवाज:
बैठक में 2025 के चुनाव में टिकट वितरण को लेकर भी सवाल उठाए गए। वक्ताओं ने दावा किया कि बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हुई और पांच-पांच सीटिंग विधायकों के टिकट काटकर अन्य लोगों को टिकट दिए गए। साथ ही 2020 के चुनाव में दूसरे स्थान पर रहे प्रत्याशियों को टिकट नहीं दिए जाने का मुद्दा भी उठाया गया। अब इन तमाम आरोपों और सवालों को लेकर नालंदा से उठी आवाज 8 सितंबर को दिल्ली के कांग्रेस मुख्यालय तक पहुंचाने की तैयारी है।नालंदा की बैठक ने संकेत दे दिया है—बिहार कांग्रेस के भीतर असंतोष अब बंद कमरों की चर्चा भर नहीं रहने वाला। 8 सितंबर का दिल्ली धरना यह तय करेगा कि राष्ट्रीय नेतृत्व इस बगावती आवाज को कितना गंभीरता से लेता है।
बैठक में प्रदेश संयोजक जमाल अहमद भल्लू, सदस्य AICC एवं पूर्व उपाध्यक्ष BPCC तथा नागेन्द्र पासवान विकल, सदस्य AICC, पूर्व अध्यक्ष BPYC, पूर्व महासचिव BPCC एवं अध्यक्ष-चौकीदार दाफादार समिति बिहार, अनिल कुमार सिंह, पूर्व विधायक नालन्दा, और छत्रपति यादव, स्वतंत्र पत्रकार, सदस्य AICC एवं पूर्व विधायक खगड़िया, मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस अवसर पर शशिभूषण कुमार टुनटुन, रमेश कुमार, दीपक कुमार, दिलीप मंडल, कुदरत उल्लाह, नजमुल होदा, ताराचंद मेहता, बच्चू सिंह, रामकेशर प्रसाद, दीपक सिंह, मनोज कुशवाहा, अजीत कुमार, किरानी पासवान, सत्येंद्र सिंह, मोजर सिंह सहित कई लोग उपस्थित थे।
अब नजर दिल्ली पर है—क्या कांग्रेस हाईकमान बिहार के इन असंतुष्ट कार्यकर्ताओं की आवाज सुनेगा, या फिर ‘प्रभारी-अध्यक्ष हटाओ’ अभियान बिहार कांग्रेस की अंदरूनी सियासत में एक और बड़ा विस्फोट करेगा?
