- डॉ अरुण कुमार मयंक –
पटना डेस्क। बिहार बीजेपी की सियासत में बड़ा सवाल खड़ा हो गया है—नितिन नबीन की नई टीम में आखिर मंगल पांडेय और संजय मयूख क्यों नहीं? जिन चेहरों की बीजेपी की राष्ट्रीय राजनीति में मजबूत पकड़ मानी जाती रही, वही चेहरे इस बार राष्ट्रीय टीम की तस्वीर से गायब हैं। एक तरफ संजय मयूख को लगातार तीसरी बार राष्ट्रीय मीडिया सह प्रभारी बनने का मौका नहीं मिला, तो दूसरी तरफ लंबे समय तक बिहार सरकार में मंत्री रहे मंगल पांडेय भी राष्ट्रीय टीम में जगह नहीं बना सके। आखिर इसे महज संयोग माना जाए या बीजेपी के भीतर बदलते सियासी समीकरण का संकेत? कहानी सिर्फ दो नेताओं के नाम कटने की नहीं है, बल्कि सवाल है कि नितिन नबीन की नई टीम आखिर किस राजनीतिक संदेश के साथ तैयार हुई है?
मंगल पांडेय को फिर झटका?
मंगल पांडेय बीजेपी के पुराने और अनुभवी चेहरों में गिने जाते हैं। बिहार सरकार में लंबे समय तक मंत्री रहे, स्वास्थ्य विभाग जैसे अहम मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाली और पश्चिम बंगाल के प्रभारी के तौर पर भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके बावजूद पहले सम्राट चौधरी की कैबिनेट में उन्हें जगह नहीं मिली और अब राष्ट्रीय संगठन की नई टीम में भी उनका नाम नजर नहीं आया। यही वजह है कि बीजेपी के राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है—क्या मंगल पांडेय के लिए पार्टी की राष्ट्रीय राजनीति का दरवाजा फिलहाल बंद है, या फिर संगठन में उनके लिए कोई अलग भूमिका तैयार हो रही है?
संजय मयूख की राष्ट्रीय टीम से विदाई क्यों?
अब बात संजय मयूख की। संजय मयूख बिहार बीजेपी का ऐसा चेहरा रहे हैं, जिसकी दिल्ली की राजनीति में भी मजबूत मौजूदगी दिखाई देती रही है। अमित शाह की टीम में वह राष्ट्रीय मीडिया सह प्रभारी रहे। जेपी नड्डा के कार्यकाल में भी उन्हें यही जिम्मेदारी मिली। लेकिन नितिन नबीन की नई टीम में राष्ट्रीय मीडिया सह प्रभारी के तौर पर उनकी वापसी नहीं हुई।
हालांकि वह पूरी तरह संगठन से बाहर नहीं हैं। उनके पास अभी भी राष्ट्रीय प्रवक्ता की जिम्मेदारी है। इसलिए इसे राजनीतिक रूप से पूर्ण किनारा करना कहना जल्दबाजी होगी। लेकिन सवाल जरूर बड़ा है—जब पुराने चेहरे को हटाया गया, तो उसकी जगह किन चेहरों को आगे लाया गया और क्यों?
मीडिया टीम में बिहार का पत्ता क्यों गायब?
नितिन नबीन की नई मीडिया टीम में अनिल बलूनी को राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी के तौर पर बरकरार रखा गया है। वहीं आशीष उषा अग्रवाल, प्रदीप भंडारी और सिद्धार्थ यादव को राष्ट्रीय मीडिया सह प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई है। सबसे ज्यादा चर्चा इसी बात की है कि इस मीडिया टीम में बिहार का एक भी चेहरा नहीं है।यानी नितिन नबीन ने अपनी टीम में क्षेत्रीय संतुलन के बजाय शायद अनुभव, संगठनात्मक जरूरत और अपनी रणनीतिक प्राथमिकताओं को ज्यादा तवज्जो दी है।
बड़ा सवाल—क्या बीजेपी में पीढ़ीगत बदलाव की शुरुआत?
पूरे घटनाक्रम को सिर्फ नियुक्तियों की सूची समझना गलती होगी। नितिन नबीन खुद बिहार से आते हैं और बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद उनकी टीम पर स्वाभाविक रूप से सबकी नजर थी। ऐसे में उनकी टीम से कुछ चर्चित पुराने चेहरों का बाहर रहना कई राजनीतिक संदेश दे सकता है।
क्या बीजेपी राष्ट्रीय संगठन में नई पीढ़ी को आगे बढ़ाने की तैयारी कर रही है?
क्या पुराने नेताओं की भूमिका अब बदलने वाली है? या फिर आने वाले दिनों में मंगल पांडेय और संजय मयूख के लिए कोई दूसरी बड़ी जिम्मेदारी सामने आएगी?
पंचमुखी न्यूज़ का निष्कर्ष:
फिलहाल इतना साफ है कि नितिन नबीन की नई टीम ने बिहार बीजेपी के भीतर चर्चा जरूर छेड़ दी है। मंगल पांडेय को इंतजार करना होगा और संजय मयूख की राष्ट्रीय मीडिया वाली जिम्मेदारी भी अब अतीत बन चुकी है। लेकिन राजनीति में किसी पद का छूटना हमेशा राजनीतिक सफर का खत्म होना नहीं होता। अब नजर इस बात पर रहेगी कि नितिन नबीन की टीम में जगह नहीं पाने वाले ये दोनों बड़े चेहरे आगे किस भूमिका में दिखाई देते हैं।क्योंकि बीजेपी की राजनीति में पद से ज्यादा मायने रखता है—अगला सियासी कदम। और मंगल पांडेय-संजय मयूख का अगला कदम ही बताएगा कि यह सिर्फ इंतजार है… या तस्वीर सचमुच बदल चुकी है।
