- पंचमुखी न्यूज़ –
बिहारशरीफ डेस्क। बिहारशरीफ में वीर अब्दुल हमीद के शहादत दिवस का मंच इस बार सिर्फ श्रद्धांजलि तक सीमित नहीं रहने वाला। 10 सितंबर को कर्पूरी भवन में होने वाले समारोह में नालंदा के साथ नवादा, शेखपुरा और जमुई से हमीद प्रेमियों को बुलाने की तैयारी ने आयोजन का दायरा बढ़ा दिया है।
वीर अब्दुल हमीद विचार मंच के अध्यक्ष मो. असगर भारती के अनुसार इस बार कार्यक्रम को पिछले वर्षों से अलग और यादगार बनाने की तैयारी है। चार जिलों से लोगों की भागीदारी का आह्वान इस आयोजन को सामाजिक एकजुटता के बड़े मंच में बदल सकता है।
श्रद्धांजलि के बहाने बड़ा राजनीतिक संदेश?
वीर अब्दुल हमीद की शहादत देशभक्ति, साहस और बलिदान की ऐसी विरासत है, जिसे किसी एक समुदाय तक सीमित नहीं किया जा सकता। यही वजह है कि चार जिलों से लोगों को जोड़ने की कोशिश को सिर्फ एक कार्यक्रम की तैयारी मानना शायद पूरी तस्वीर नहीं होगी।
सवाल यह है कि क्या बिहारशरीफ से उठने वाली यह आवाज आने वाले समय में सामाजिक और राजनीतिक विमर्श को भी प्रभावित करेगी?
नालंदा से निकलकर नवादा, शेखपुरा और जमुई तक पहुंचने वाला यह संदेश यदि जमीन पर भीड़ और जनभागीदारी में बदलता है, तो आयोजन की राजनीतिक अहमियत अपने-आप बढ़ जाएगी। हालांकि, फिलहाल इसे किसी राजनीतिक दल या चुनावी अभियान से जोड़ना जल्दबाजी होगी।
10 सितंबर पर निगाहें क्यों?
कर्पूरी भवन में होने वाला यह समारोह अब सिर्फ श्रद्धांजलि का कार्यक्रम नहीं, बल्कि कितने लोग जुटते हैं, कौन-कौन चेहरे पहुंचते हैं और मंच से क्या संदेश निकलता है—इन सवालों का भी केंद्र बन सकता है।यानी 10 सितंबर को बिहारशरीफ में सिर्फ शहादत दिवस नहीं मनाया जाएगा, बल्कि यह भी दिखेगा कि वीर अब्दुल हमीद की विरासत के नाम पर कितनी बड़ी सामाजिक ताकत एक मंच पर जुटती है।
