- डॉ अरुण कुमार मयंक –
पटना डेस्क। बिहार विधानसभा का मानसून सत्र आखिरी दिन रणभूमि में बदल गया। छात्र आंदोलन को लेकर ऐसा बवाल मचा कि सदन शुरू होने के महज 5 मिनट के भीतर ही कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। एक तरफ विपक्ष ने सरकार पर लाठी-गोली से छात्रों की आवाज दबाने का आरोप लगाया, तो दूसरी ओर सत्ता पक्ष ने आंदोलन की आड़ में गुंडागर्दी और सरकारी संपत्ति पर हमले का दावा किया। नारेबाजी, तीखी नोकझोंक और हंगामे के बीच पूरा सदन गूंज उठा। आखिर ऐसा क्या हुआ कि स्पीकर को बीच में ही कार्यवाही रोकनी पड़ी? पढ़िए पूरी रिपोर्ट…
छात्र आंदोलन पर विधानसभा में जबरदस्त संग्राम, 5 मिनट में ठप हुई कार्यवाही:
पटना में चल रहे छात्र आंदोलन की गूंज शुक्रवार को बिहार विधानसभा के अंदर भी सुनाई दी। मानसून सत्र के अंतिम दिन सदन की शुरुआत होते ही विपक्षी विधायकों ने छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई का मुद्दा उठा दिया। देखते ही देखते सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए और सदन में जोरदार हंगामा शुरू हो गया। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि स्पीकर डॉ. प्रेम कुमार को सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित करनी पड़ी। पहली पाली में विधानसभा की कार्यवाही महज पांच मिनट ही चल सकी।
राजद ने लगाया लाठीचार्ज और गोली चलाने का आरोप:
राजद विधायक आलोक मेहता ने कहा कि छात्र अपनी जायज मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे थे, लेकिन सरकार ने उनके साथ पुलिसिया दमन किया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया गया और दूसरे दिन गोलियां भी चलाई गईं। उनका दावा था कि पटना से लेकर दिल्ली तक छात्रों को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा गया। इन आरोपों के बाद सदन का माहौल पूरी तरह गरमा गया।
सत्ता पक्ष का पलटवार- ‘ये छात्र नहीं, उपद्रवी हैं’
विपक्ष के आरोपों पर बीजेपी, जदयू और लोजपा (रामविलास) के विधायक एक साथ खड़े हो गए। उन्होंने कहा कि आंदोलन की आड़ में उपद्रवी तत्व पुलिस, प्रशासन, मीडिया और आम लोगों पर हमला कर रहे हैं। सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया जा रहा है और नेताओं की गाड़ियों में भी तोड़फोड़ की गई।
लोजपा (आरवी) विधायक राजू तिवारी ने कहा कि पत्थरबाजी करने वालों को छात्र नहीं कहा जा सकता। सरकार ऐसे लोगों पर सख्त कार्रवाई कर रही है तो विपक्ष को परेशानी क्यों हो रही है।
निंदा प्रस्ताव की मांग से और बढ़ा बवाल:
राजू तिवारी ने सदन में मांग की कि आंदोलन के नाम पर हो रही कथित गुंडागर्दी के खिलाफ निंदा प्रस्ताव लाया जाए। इसके बाद विपक्षी विधायक अपनी सीटों से उठकर जोरदार नारेबाजी करने लगे। सत्ता पक्ष ने भी जवाबी विरोध शुरू कर दिया और सदन में शोर-शराबा चरम पर पहुंच गया।
स्पीकर की अपील भी बेअसर:
स्पीकर डॉ. प्रेम कुमार ने कई बार सभी सदस्यों से अपनी-अपनी सीट पर बैठने और शांतिपूर्वक अपनी बात रखने की अपील की। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सभी को बोलने का मौका मिलेगा, लेकिन किसी ने उनकी अपील नहीं मानी। लगातार हंगामे के चलते आखिरकार उन्होंने सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दी।
अब सबसे बड़ा सवाल:
बिहार में छात्र आंदोलन का मुद्दा अब सड़कों से निकलकर विधानसभा तक पहुंच चुका है। विपक्ष इसे छात्रों की आवाज दबाने का मामला बता रहा है, जबकि सरकार कानून-व्यवस्था और उपद्रव पर कार्रवाई की बात कर रही है। ऐसे में सवाल यही है कि क्या यह विवाद अब और ज्यादा राजनीतिक रंग लेगा या छात्रों की मांगों पर कोई ठोस समाधान निकलेगा?
