-डॉ अरुण कुमार मयंक-
पटना डेस्क। बिहार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग द्वारा 14 जुलाई 2026 को जारी राज्य स्तरीय स्थानांतरण सूची अब बड़े विवाद के केंद्र में आ गई है। बिहार राज्य भूमि सुधार कर्मचारी संघ संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने विभागीय सचिव को सीधे कटघरे में खड़ा करते हुए आरोप लगाया है कि पूरी स्थानांतरण प्रक्रिया व्यापक अनियमितताओं, अपारदर्शिता और विभागीय SOP के खुले उल्लंघन का उदाहरण बन गई है। संघ ने दावा किया है कि सूची में सेवानिवृत्त और मृत कर्मचारियों तक के नाम शामिल हैं, जबकि दिव्यांग, महिला और प्रोन्नति के पात्र कर्मचारियों के साथ भी गंभीर अन्याय किया गया है।
संघ द्वारा सचिव को भेजे गए विस्तृत ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि कर्मचारियों से तीन-तीन जिला विकल्प लेने के बावजूद अधिकांश मामलों में उन विकल्पों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया। इतना ही नहीं, जिन कर्मचारियों ने स्थानांतरण प्रपत्र तक नहीं भरा था, उनका भी तबादला कर दिया गया, जबकि विभाग ने पहले आश्वासन दिया था कि ऐसे कर्मचारियों का स्थानांतरण नहीं होगा। इससे पूरी प्रक्रिया की निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
सबसे चौंकाने वाला आरोप यह है कि स्थानांतरण सूची में मृत एवं सेवानिवृत्त कर्मचारियों के नाम भी शामिल कर दिए गए। यदि यह आरोप सही साबित होता है तो यह केवल तकनीकी त्रुटि नहीं बल्कि विभागीय सत्यापन प्रक्रिया की गंभीर विफलता मानी जाएगी। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर सूची तैयार करते समय जिम्मेदार अधिकारियों ने किस आधार पर अंतिम स्वीकृति दी और क्या विभागीय सचिव स्तर पर इसकी समुचित समीक्षा हुई थी?
संघ ने यह भी आरोप लगाया है कि दिव्यांग कर्मचारियों को उनकी शारीरिक परिस्थितियों की अनदेखी करते हुए दूर-दराज जिलों में भेज दिया गया, जबकि महिला कर्मचारियों के पारिवारिक एवं सामाजिक पक्षों को भी महत्व नहीं दिया गया। प्रोन्नति की प्रतीक्षा कर रहे वरिष्ठ कर्मचारियों का पहले प्रमोशन करने के बजाय सीधे स्थानांतरण कर देना भी संघ ने सेवा न्याय के खिलाफ बताया है।
राजस्व कर्मचारियों का कहना है कि उनका आंदोलन केवल स्थानांतरण तक सीमित नहीं है। वर्षों से लंबित ग्रेड पे 2800, समयबद्ध प्रोन्नति, सेवा संपुष्टि, रिक्त पदों की बहाली और अत्यधिक कार्यभार जैसे मुद्दे आज भी समाधान की प्रतीक्षा में हैं। ऐसे माहौल में विवादित स्थानांतरण आदेश ने कर्मचारियों के असंतोष को और अधिक भड़का दिया है।
संघ ने दो टूक घोषणा की है कि जब तक स्थानांतरण सूची की निष्पक्ष समीक्षा, प्रोन्नति योग्य कर्मचारियों की प्रोन्नति और सभी राजस्व कर्मचारियों के लिए ग्रेड पे 2800 लागू नहीं किया जाता, तब तक कर्मचारी नए पदस्थापन स्थल पर योगदान नहीं देंगे। साथ ही चेतावनी दी गई है कि मांगें नहीं मानी गईं तो लोकतांत्रिक तरीके से अनिश्चितकालीन धरना, प्रदर्शन और सामूहिक अवकाश जैसे आंदोलन तेज किए जाएंगे।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या विभाग इन गंभीर आरोपों की स्वतंत्र जांच कराएगा, या फिर विवाद और गहराएगा? कर्मचारियों द्वारा लगाए गए आरोप प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर प्रश्न खड़े करते हैं। हालांकि, इन आरोपों पर विभाग की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना अभी बाकी है। यदि विभाग इन आरोपों का खंडन या स्पष्टीकरण जारी करता है, तो उससे पूरे मामले की स्थिति और स्पष्ट होगी।
(यह खबर कर्मचारी संघ द्वारा सचिव को सौंपे गए ज्ञापन में लगाए गए आरोपों पर आधारित है। विभाग का आधिकारिक पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)
