- डॉ अरुण कुमार मयंक –
पटना डेस्क। बिहार में पहली बार ऐसा हुआ है, जिसने सरकारी तबादलों की पूरी तस्वीर बदल दी है। न सिफारिश, न सेटिंग और न ही किसी तरह का मानवीय हस्तक्षेप! सिर्फ एक क्लिक और 3,268 राजस्व कर्मचारियों का ट्रांसफर कंप्यूटर ने तय कर दिया। सरकार इसे पारदर्शिता की सबसे बड़ी मिसाल बता रही है, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या अब सरकारी तबादलों से ‘जुगाड़ सिस्टम’ हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा? आखिर किसे मिली मनचाही पोस्टिंग और किसे जाना पड़ा पड़ोसी जिले? जानिए इस ऐतिहासिक फैसले की पूरी कहानी।
बिहार में अब तक का सबसे बड़ा ट्रांसफर, कंप्यूटर ने तय की पोस्टिंग:
बिहार सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने राज्य के इतिहास में पहली बार पूरी तरह तकनीक आधारित तबादला प्रक्रिया अपनाते हुए 3,268 राजस्व कर्मचारियों का स्थानांतरण कर दिया। इस पूरी प्रक्रिया में ऑनलाइन आवेदन और रैंडमाइज्ड कंप्यूटर सिस्टम का इस्तेमाल किया गया, जिससे किसी भी तरह के मानवीय हस्तक्षेप की संभावना लगभग समाप्त हो गई। इस ऐतिहासिक प्रक्रिया को विभागीय मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने कंप्यूटर का बटन क्लिक कर मंजूरी दी। सरकार का दावा है कि इससे ट्रांसफर प्रक्रिया पहले से कहीं अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष बनेगी।
न सिफारिश… न सेटिंग, सिर्फ ऑनलाइन आवेदन का खेल:
इस बार सभी कर्मचारियों से बिहार भूमि पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन लिए गए। इसके बाद कंप्यूटर आधारित रैंडमाइज्ड सिस्टम ने तय मानकों के अनुसार पोस्टिंग निर्धारित की। सरकार का कहना है कि नई व्यवस्था में किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत भूमिका नहीं रही, जिससे पक्षपात और मनमानी की आशंका काफी हद तक खत्म हो गई।
इन नियमों के आधार पर मिली पोस्टिंग
स्थानांतरण के दौरान सरकार ने कई प्राथमिकताओं को लागू किया। इनमें शामिल रहे—
- दूरी का मानक
- महिला कर्मचारियों को प्राथमिकता
- पति-पत्नी को एक स्थान पर पोस्टिंग (स्पाउस ग्राउंड)
- गंभीर बीमारी
- दिव्यांगता
- अन्य विशेष परिस्थितियां
इन्हीं मानकों के आधार पर कंप्यूटर ने अंतिम सूची तैयार की।
कितनों को मिली मनचाही पोस्टिंग? आंकड़े चौंका देंगे
स्थानांतरित 3,268 कर्मचारियों में—
- 3,142 पुरुष
- 126 महिला कर्मचारी शामिल हैं।
सबसे बड़ी बात यह रही कि— - 1,820 कर्मचारियों को उनकी पहली पसंद मिली।
- 380 कर्मचारियों को दूसरी पसंद।
- 141 कर्मचारियों को तीसरी पसंद की पोस्टिंग मिली।
यानी कुल 2,341 कर्मचारियों को उनकी पसंद के अनुसार तैनाती दी गई। वहीं 880 कर्मचारियों को उनके गृह जिले के पड़ोसी जिले में पदस्थापित किया गया।
अब अमीनों की बारी, पूरे विभाग में लागू होगा डिजिटल सिस्टम:
राजस्व विभाग ने साफ कर दिया है कि अब इसी तकनीक आधारित मॉडल से अमीनों का स्थानांतरण भी जल्द किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य विभाग के अन्य प्रशासनिक कार्यों में भी डिजिटल और पारदर्शी व्यवस्था लागू करना है।
बड़ा सवाल: क्या खत्म हो जाएगा ट्रांसफर में ‘जुगाड़ सिस्टम’?
सरकार इस मॉडल को पारदर्शिता की दिशा में बड़ा कदम बता रही है। यदि यह व्यवस्था लगातार निष्पक्ष तरीके से लागू होती रही तो वर्षों से तबादलों को लेकर लगने वाले पक्षपात, सिफारिश और सेटिंग जैसे आरोपों पर काफी हद तक रोक लग सकती है। हालांकि इसकी असली सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि भविष्य में भी यही प्रक्रिया बिना किसी अपवाद के लागू रहती है या नहीं।
पंचमुखी न्यूज़ विश्लेषण:
बिहार सरकार का यह फैसला सिर्फ एक ट्रांसफर आदेश नहीं, बल्कि सरकारी प्रशासन को डिजिटल और पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा प्रयोग माना जा रहा है। यदि यह मॉडल सफल साबित होता है तो आने वाले समय में अन्य विभागों में भी इसी तरह की तकनीक आधारित तबादला व्यवस्था लागू हो सकती है। यही कारण है कि यह फैसला पूरे प्रशासनिक तंत्र में चर्चा का विषय बन गया है।
