

- डॉ. अरुण कुमार मयंक –
- एक्सक्लूसिव रिपोर्ट –
पटना स्टेट ब्यूरो। बिहार की माटी में जन्मी एक बेटी ने दुनिया के सबसे कठिन और रहस्यमय महाद्वीप अंटार्कटिका में इतिहास लिख दिया है। नालंदा जिले की रहने वाली आरती गुप्ता अब सिर्फ एक मौसम विज्ञानी नहीं रहीं, बल्कि बिहार की पहली महिला बन गई हैं, जिन्होंने अंटार्कटिका की बर्फ़ीली ज़मीन पर कदम रखा है। इतना ही नहीं, वे भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की भी पहली महिला वैज्ञानिक हैं, जिन्हें इस ऐतिहासिक अभियान के लिए चुना गया है। यह उपलब्धि सिर्फ व्यक्तिगत नहीं, बल्कि पूरे बिहार और देश की बेटियों के लिए प्रेरणा की मिसाल बन गई है।
🌟 45वें भारतीय अंटार्कटिका शीतकालीन अभियान का हिस्सा:
IMD, पटना में पदस्थापित आरती गुप्ता को 45वें भारतीय अंटार्कटिका शीतकालीन अभियान के लिए चयनित किया गया है। इस अभियान में कुल 52 सदस्यीय दल शामिल है, जिसमें वैज्ञानिकों के साथ तकनीकी, चिकित्सा और लॉजिस्टिक विशेषज्ञ भी हैं। इस अभियान का उद्देश्य अंटार्कटिका में मौसम और जलवायु परिवर्तन, वायुमंडलीय गतिविधियों और ध्रुवीय पर्यावरण पर शोध को आगे बढ़ाना है।
🚀 एक लेख से शुरू हुआ सपना, हकीकत में बदला इतिहास:
आरती गुप्ता बताती हैं कि IMD ज्वाइन करने के शुरुआती दिनों में उन्होंने विभागीय पत्रिका में अंटार्कटिका अभियानों पर एक लेख पढ़ा था। उसी क्षण उन्होंने तय कर लिया- “एक दिन मैं भी अंटार्कटिका जाऊंगी।” आज वही संकल्प, वर्षों की मेहनत और धैर्य के बाद इतिहास बन चुका है।
🌟 दुनिया की सबसे कठिन ज़मीन पर भारत का परचम:
अंटार्कटिका को दुनिया का सबसे कठिन महाद्वीप माना जाता है। यहां तापमान शून्य से कई डिग्री नीचे, महीनों तक सूरज नहीं निकलता, तेज़ बर्फ़ीली हवाएं और बाहरी दुनिया से सीमित संपर्क रहता है। ऐसे हालात में काम करना सिर्फ वैज्ञानिक दक्षता नहीं, बल्कि असाधारण साहस की मांग करता है।
🏔️ चयन से पहले कड़ी परीक्षा:
अंटार्कटिका अभियान के लिए चयन आसान नहीं था। आरती गुप्ता को पहले
🔹 एम्स, नई दिल्ली में एक सप्ताह तक शारीरिक व मानसिक फिटनेस जांच
🔹 आईटीबीपी औली में एक महीने का बर्फ़, स्कीइंग और सर्वाइवल प्रशिक्षण
🔹 इसके बाद दो सप्ताह का विशेष तकनीकी प्रशिक्षण से गुजरना पड़ा।
इन सभी कठिन चरणों को पार करने के बाद ही उन्हें अंतिम रूप से चुना गया।
🚀 “मैं सिर्फ वैज्ञानिक नहीं, बिहार की बेटियों की प्रतिनिधि हूं”:
अभियान पर रवाना होने से पहले आरती गुप्ता ने कहा- “मैं वहां सिर्फ एक वैज्ञानिक के रूप में नहीं, बल्कि बिहार और भारत की बेटियों की प्रेरणा बनकर जा रही हूं।” उनका मानना है कि यह उपलब्धि साबित करती है कि अगर अवसर और हौसला मिले, तो बेटियां किसी भी सीमा को पार कर सकती हैं।
🌟 नालंदा की बेटी, देश का गौरव:
नालंदा की इस बेटी ने यह दिखा दिया कि सपनों की कोई सीमा नहीं होती—चाहे वह अंटार्कटिका की बर्फ़ ही क्यों न हो। आज आरती गुप्ता बिहार का गर्व हैं, देश की पहचान हैं और आने वाली पीढ़ी के लिए संघर्ष, संकल्प और सफलता की जीवंत कहानी हैं।
यह कहानी बताती है कि
सपने गांव या शहर देखकर नहीं आते,
बस उन्हें पूरा करने की ज़िद होनी चाहिए।
🌟 प्रेरणा की धरोहर:
नालंदा की इस बेटी ने यह दिखा दिया कि
अगर अवसर, शिक्षा और आत्मविश्वास मिल जाए—
तो बेटियां अंटार्कटिका की बर्फ़ भी चीर सकती हैं।
🌟 आरती गुप्ता की यह उपलब्धि
🔹महिला सशक्तिकरण की मिसाल है
🔹विज्ञान में महिलाओं की सशक्त भागीदारी का प्रमाण है
🔹और बिहार की बेटियों के लिए
“हम भी कर सकते हैं” का जीवंत संदेश है।
