
- डॉ अरुण कुमार मयंक –
बिहारशरीफ डेस्क। ज्ञान, संस्कृति और साहित्य की ऐतिहासिक भूमि नालंदा एक बार फिर विश्व का ध्यान आकर्षित करने जा रही है। 12 से 15 मार्च 2026 तक आयोजित होने वाला Nalanda International Literature Festival 2026 प्राचीन बौद्धिक परंपरा को आधुनिक विचारों से जोड़ने का मंच बनेगा। तीन दिनों तक कार्यक्रम Rajgir International Convention Centre में होंगे, जबकि 15 मार्च को नालंदा की ऐतिहासिक धरोहरों को निहारने के लिए विशेष हेरिटेज वॉक आयोजित की जाएगी।
🌍 70 से अधिक वैश्विक हस्तियों का जुटान:
चार दिवसीय इस महोत्सव में भारत सहित कई देशों के लेखक, दार्शनिक, पत्रकार और कलाकार भाग लेंगे। ब्रिटेन, अमेरिका, सूरीनाम, फिजी और तिब्बत से आए प्रतिनिधि इस मंच पर विचारों का आदान-प्रदान करेंगे। मुख्य अतिथियों में प्रसिद्ध लेखक Daniel Hahn, फिल्म समीक्षक Bhavana Somaya, कवयित्री Gagan Gill, अभिनेता Amol Palekar, सांसद Priyanka Chaturvedi, वरिष्ठ पत्रकार Om Thanvi, कवि Neelotpal Mrinal, थिएटर लेखिका Sandhya Gokhale और अंतरराष्ट्रीय रैपर Chaitanya Sharma समेत कई नामचीन हस्तियां शामिल होंगी।
🪶 बिहार की साहित्यिक आवाज को मिलेगा मंच:
महोत्सव की खासियत है कि बिहार के लेखकों और उभरते रचनाकारों को प्राथमिकता दी जा रही है। प्रख्यात लेखक Ratneshwar Singh और Ram Bachan Rai सहित कई स्थानीय कवि, लेखक और विद्वान चर्चा, काव्यपाठ और विमर्श में हिस्सा लेंगे। आयोजकों का लक्ष्य स्पष्ट है— बिहार की बौद्धिक परंपरा को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाना।
📚 मुख्य विषय: विश्व बंधु से विश्वगुरु तक:
इस वर्ष का केंद्रीय विषय है— “रीक्राफ्टिंग भारत: विश्व बंधु से विश्वगुरु तक”
यह विषय आधुनिक विश्व में प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा की भूमिका पर गहन चर्चा को प्रेरित करेगा।
🍲 “लिट भी, लिट्टी भी”– साहित्य संग बिहारी स्वाद:
महोत्सव केवल विचारों का नहीं, बिहार की संस्कृति और स्वाद का भी उत्सव होगा। आकर्षक स्लोगन “लिट भी, लिट्टी भी” साहित्य और पारंपरिक भोजन का अनोखा संगम प्रस्तुत करेगा। पाक मंच “इमेजिन” के शेफ निशांत चौबे और कृतर झा विदेशी मेहमानों को लिट्टी-चोखा सहित प्रामाणिक बिहारी व्यंजन परोसेंगे।
🎨 कला, संस्कृति और लोक परंपराओं का रंग:
महोत्सव में लाइव पेंटिंग वर्कशॉप, कला प्रदर्शनी और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी होंगी। “गौरवशाली नालंदा – ज्ञान का केंद्र” विषय पर कलाकार अपनी रचनाएं सजीव रूप में उकेरेंगे। परिधि आर्ट ग्रुप के संस्थापक निर्मल वैद रंगों से इस आयोजन को खास बनाएंगे। साथ ही बिहार के लोकगीत, जनजातीय परंपराएं और थारू जनजाति की सांस्कृतिक झलक भी दर्शकों को देखने को मिलेगी।
📖 “लिट कनेक्ट” से गांवों की प्रतिभा को मौका:
“लिट कनेक्ट” पहल के तहत प्रकाशक सीधे ग्रामीण लेखकों से जुड़ेंगे। इससे गांवों की नई प्रतिभाओं को प्रकाशन जगत में प्रवेश का अवसर मिलेगा। स्कूल-कॉलेज के छात्र और युवा कलाकार भी मंच पर अपनी प्रतिभा दिखा सकेंगे।
🧒 बच्चों के लिए ‘नालंदा कॉमिक्स’:
महोत्सव में “नालंदा कॉमिक्स” पहल की शुरुआत भी होगी। इसकी पहली पुस्तक “पातालोक” कॉमिक्स शैली में नालंदा की प्राचीन कहानियों को जीवंत बनाएगी। उद्देश्य— बच्चे नालंदा को सिर्फ खंडहर नहीं, बल्कि ज्ञान और कथाओं से भरी जीवंत विरासत के रूप में देखें।
🌱 “नालंदा-आई” से ज्ञान समुदाय की शुरुआत:
उत्सव के दौरान “नालंदा-आई (NalandAi)” नामक ज्ञान समुदाय की नींव रखी जाएगी। इसका लक्ष्य है—ग्रामीण पुस्तकालयों की स्थापना, 100% साक्षरता अभियान, ज्ञान आधारित समाज का निर्माण, सिद्धांत स्पष्ट है— न राजनीति, न जाति-पंथ का भेद; केवल शुद्ध ज्ञान।
🎥 19 वर्षों की सांस्कृतिक यात्रा:
आयोजकों की यात्रा 2007 की डॉक्यूमेंट्री “नालंदा जर्नी टू विजडम” से शुरू हुई। तब से बिहार पर्यटन, कला और संस्कृति पर 30 से अधिक पुस्तकें प्रकाशित की जा चुकी हैं। 400 से अधिक प्राचीन शैलचित्रों का दस्तावेजीकरण कर उन्हें Bihar Museum में सुरक्षित किया गया है।
⭐बिहार फिर बनेगा ज्ञान का केंद्र:
नालंदा अंतरराष्ट्रीय साहित्य महोत्सव 2026 केवल एक आयोजन नहीं, बिहार की बौद्धिक विरासत को विश्व मंच पर पुनर्स्थापित करने का प्रयास है। चार दिनों तक नालंदा की पावन भूमि से ज्ञान, संस्कृति और साहित्य की नई रोशनी दुनिया तक पहुंचेगी।
मुख्य आयोजक वैशाली सेटा ने कहा कि Nalanda International Literature Festival 2026 केवल एक साहित्यिक आयोजन नहीं, बल्कि बिहार की प्राचीन बौद्धिक परंपरा को वैश्विक मंच पर पुनर्स्थापित करने का एक सशक्त प्रयास है। उनका कहना था कि जिस धरती ने कभी ज्ञान की किरणों से पूरे विश्व को आलोकित किया, वही नालंदा आज फिर से विचारों, साहित्य और संस्कृति के अंतरराष्ट्रीय संवाद का केंद्र बनने जा रही है।
को-फाउंडर दिव्याभ आर्यन ने बताया कि महोत्सव का उद्देश्य नालंदा की ऐतिहासिक विरासत को नई पीढ़ी और वैश्विक समाज से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि इस मंच के माध्यम से भारत और दुनिया के विचारक, लेखक और कलाकार एकत्रित होकर ज्ञान, संस्कृति और समकालीन मुद्दों पर संवाद करेंगे। साथ ही बिहार के स्थानीय लेखकों और युवा प्रतिभाओं को भी अंतरराष्ट्रीय मंच प्रदान किया जाएगा।
कवि संजीव मुकेश ने कहा कि यह आयोजन बिहार की साहित्यिक और सांस्कृतिक शक्ति को दुनिया के सामने प्रस्तुत करने का एक अनूठा अवसर है। उनके अनुसार नालंदा केवल एक ऐतिहासिक स्थल नहीं, बल्कि विचार, ज्ञान और संवाद की जीवंत परंपरा का प्रतीक है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान Vaishali Seta, Divyabh Aryan और कवि Sanjeev Mukesh ने संयुक्त रूप से महोत्सव की रूपरेखा और उद्देश्य पर विस्तार से प्रकाश डाला। आयोजकों ने विश्वास व्यक्त किया कि नालंदा अंतरराष्ट्रीय साहित्य महोत्सव 2026 एक बार फिर विश्व का ध्यान बिहार की ओर आकर्षित करेगा और नालंदा की उस गौरवशाली पहचान को पुनर्जीवित करेगा, जिसने सदियों पहले पूरे विश्व को ज्ञान की रोशनी प्रदान की थी।
