- डॉ. अरुण कुमार मयंक-
पटना स्टेट ब्यूरो। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में एनडीए को प्रचंड बहुमत मिला। इस चुनाव के नतीजों में सबसे बड़ा भूचाल नालंदा से आया। एक बार फिर वही सच सामने आया- नीतीश कुमार का नालंदा अजेय है, अडिग है, अटल है।
जिले में सात की सात सीटें NDA के खाते में गईं। महागठबंधन को एक सीट भी नहीं मिली। साफ-साफ, क्लीन स्वीप…7-0 का ऐतिहासिक स्कोर! आज नालंदा का मतलब है नीतीश कुमार। वर्चस्व, पकड़ और जनाधार- सब कुछ जस का तस। मतलब साफ- नालंदा ने 7–0 के स्कोर से नीतीश पर मुहर लगा दी। आज फिर कहा जा रहा है- “नालंदा मतलब नीतीश कुमार”
अब सातों सीटों पर नज़र डालिए, कैसे मतदाता बोले—“NDA ही सही!”
⭐ अस्थावां : जदयू की सुनामी, जीत 40,708 वोट से
जदयू के जितेंद्र कुमार ने राजद के रवि रंजन को रौंद दिया।
मत मिले- 90,542 बनाम 49,834। लता सिंह 15962 (जन सुराज) वोट लाकर रही तीसरे नंबर पर।
मतदान—56.81%। अस्थावां ने नीतीश के नेतृत्व को खुला आशीर्वाद दिया।
⭐ हिलसा : कृष्ण मुरारी शरण ने पलटी हवा, 16012 वोटों से जीत
राजद के शक्ति यादव को चुनौती- पर जदयू भारी पड़ा।
96,009 बनाम 79,997 वोट।
मतदान—63.20%।
हिलसा ने ‘दोहरे मुकाबले’ में NDA का झंडा गाड़ दिया।
⭐ बिहारशरीफ : BJP का जलवा, डॉ. सुनील की 29,168 की बंपर जीत
कांग्रेस के उमैर खान 80136 वोट लाकर भी रह गए दूर। डॉ सुनील कुमार को कुल 109304 वोट मिले।
मतदान—55%।
शहरी सीट ने भी NDA का ही दामन थामा।
⭐ हरनौत : हरि नारायण सिंह की दिग्गजों वाली जीत, 48,335 का अंतर
कांग्रेस के अरुण कुमार को नहीं मिला मुकाबला। इन्हें 58619 वोट मिले, जबकि हरि नारायण सिंह को 106954 वोट मिले।
मतदान—59.95%।
हरनौत ने साफ कहा- हमारी पसंद पुराना भरोसा।
⭐ राजगीर (SC) : 55,428 वोटों की गूंज- कौशल किशोर का दबदबा कायम
भाकपा-माले के विश्वनाथ चौधरी 52383 वोट लाकर भी हारे। कौशल किशोर को 107811 वोट मिले।
मतदान—62.03%।
राजगीर में भी विकास की लाइन पर NDA भारी।
⭐ इस्लामपुर : रुहेल रंजन का धमाका, महागठबंधन फिर धराशायी
राजद के राकेश कुमार रोशन 68248 को रोक दिया भारी जनादेश ने। जबकि रुहैल रंजन को 100487 वोट मिले ।
मतदान—61.77%
इस्लामपुर ने भी NDA की जीत की लय बनाए रखी।
🔥 नालंदा ने दिया सबसे बड़ा संदेश:
– नीतीश के खिलाफ लहर नहीं, समर्थन की सुनामी थी।
– जातीय गोलबंदी से ज्यादा वोटरों ने स्थिरता को चुना।
– सातों सीटों पर भारी अंतर—किलाबंदी अभेद्य साबित।
– महागठबंधन की रणनीति फेल—कहीं भी कड़ा मुकाबला नहीं।
– संगठन, उम्मीदवार चयन और नीतीश की छवि—तीनों फैक्टर ने मिलकर 7–0 कर दिया।
