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पटना स्टेट डेस्क। बिहार के कोने-कोने में नवरात्रि व विजयादशमी का पावन पर्व बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। इस अवसर पर क्षमता के अनुसार विभिन्न स्थलों पर छोटे-बड़े पंडाल बनाये जाते हैं। हर वर्ष इन पूजा पंडालों का निर्माण अलग-अलग थीम व अनुकृति पर कराये जाते हैं। इन पंडालों में माँ दुर्गे की रंग-बिरंगी भव्य व आकर्षक प्रतिमाएं स्थापित की जाती हैं। इन पूजा पंडालों में लाइटिंग व डेकोरेशन की बहुत अच्छी व्यवस्था की जाती है। इस वर्ष बेगूसराय का एक पंडाल अत्यधिक चर्चा में है। इसका कारण माँ दुर्गे अपने भाले से महिषासुर की जगह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का वध करती हुई दिखाई दे रही हैं।

महिषासुर के बदले डोनाल्ड ट्रंप का वध: बेगूसराय के विष्णुपुर चांदनी चौक स्थित सार्वजनिक दुर्गा मंदिर का पंडाल सर्वाधिक आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। इस पंडाल में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की यह प्रतिमा बनाई गई है। शेर पर सवार मां दुर्गा को ‘महिषासुर रूपी डोनाल्ड ट्रंप’ पर भाला से वार करते हुए दिखाया गया है। ट्रंप के एक हाथ में विषधर सांप लटका हुआ है। उनका चेहरा दर्द से चीखता नजर आ रहा है। वहीं शेर भी उन पर गु्र्रा रहा है।
ट्रंप को महिषासुर क्यों बताया?: इस बारे में दुर्गा पूजा समिति के अध्यक्ष राजकिशोर प्रसाद कहते हैं कि जब-जब पृथ्वी पर अत्याचार बढ़ा है, तब-तब किसी न किसी रूप में माता का अवतार होता है और अत्याचारियों का वध करती हैं। जहां तक महिषासुर की जगह डोनाल्ड ट्रंप की प्रतिमा का प्रश्न है तो वह भी भारत पर अत्याचार ही कर रहे हैं। वीजा पर टैक्स बढ़ा दिया और भारतीय उत्पादों पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगा दिया।

ट्रंप को लेकर नाराजगी: दुर्गा पूजा समिति के सदस्यों का कहना है कि डोनाल्ड ट्रंप ने सिर्फ टैरिफ और वीजा पर टैक्स ही नहीं बढ़ाया, बल्कि हमारी सेना के शौर्य पर भी सवाल उठाने की कोशिश की। मुकेश कुमार कहते हैं कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान हमारी सेना ने पाकिस्तान को मुंहतोड़ जवाब दिया था। इस वजह से पाकिस्तान को सीजफायर के लिए हमारे सामने गिड़गिड़ाना पड़ गया। लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति ने भारतीय सेना के शौर्य को कम करने की नीयत से झूठा दावा किया कि उनकी वजह से ‘युद्ध विराम’ हुआ।
पहले भी ऐसी प्रतिमा लगी थी: मंदिर समिति से जुड़े लोगों का कहना है कि यह सिर्फ लोगों की भावना है। इसे कलाकार ने मूर्ति बनाकर दर्शाया है। इसे किसी भी तरह से राजनीति से नहीं जोड़ना चाहिए। मंदिर समिति से जुड़े मुकेश कुमार बताते हैं कि इससे पहले भी चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री इमरान खान की भी इसी तरह की प्रतिमा लगाई गई थी।
