इंडिया गठबंधन की समन्वय समिति में सीटों के बंटवारे पर अभी निर्णय नहीं हुआ है। अगस्त तो वोट अधिकार यात्रा में ही निकल जाना है। सो अगुआ राजद को कोई जल्दबाजी नहीं है। राजद सामाजिक समीकरणों को देखकर सीटें तय करेगा। पिछली बार की सीटों में बदलाव भी संभव है। कांग्रेस और वीआईपी जल्द बंटवारा चाहते हैं। वीआईपी की अधिक सीटों की मांग से कांग्रेस असहमत है। वामदलों का प्रदर्शन बेहतर रहा है। ऐसे में सितंबर के आखिरी सप्ताह से पहले सीटों का बंटवारा शायद ही हो। इस बीच जुड़ने-छूटने वाले नए-पुराने साथियों की वास्तविकता भी सार्वजनिक हो चुकी होगी।
– राजनीतिक विश्लेषण –
पटना स्टेट डेस्क। इंडिया गठबंधन में इस बार सीटों का बंटवारा केवल पसंद और परंपरागत फॉर्मूले के आधार पर नहीं होगा। दावेदारी के लिए सामाजिक समीकरण के साथ प्राथमिकता जीत की गारंटी होगी। इसी आधार पर अगुआ राजद सहयोगियों के लिए सीटें चिन्हित कर रहा। पिछली बार एक-दूसरे के खाते में आई सीटों की अदला-बदली भी हो सकती है।
सीटों पर समझौते के क्रम में इंडिया गठबंधन की समन्वय समिति की बातचीत अभी किसी निर्णायक मोड़ पर नहीं पहुंची है। अभी राजद के स्तर से क्षेत्र में सर्वे का काम भी शत-प्रतिशत पूरा नहीं हुआ। ऐसे में सितंबर के आखिरी सप्ताह से पहले सीटों का बंटवारा शायद ही हो। इस बीच जुड़ने-छूटने वाले नए-पुराने साथियों की वास्तविकता भी सार्वजनिक हो चुकी होगी।
अगस्त तो वोट अधिकार यात्रा में ही निकल जाना है। इसलिए भी राजद को कोई जल्दबाजी नहीं। अलबत्ता कांग्रेस और विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के स्तर से यथाशीघ्र सीट बंटवारे का दबाव है, ताकि संभावित प्रत्याशी क्षेत्र भ्रमण कर सकें। ऐसे में उनके हिस्से की विवाद-रहित कुछ सीटों का संकेत कर दिया जाएगा।
इंडिया गठबंधन में अभी छह दल (राजद, कांग्रेस, माले, भाकपा, माकपा, वीआईपी) हैं। आगे झामुमो के साथ पशुपति कुमार पारस के नेतृत्व वाली रालोसपा भी इसका अंश हो सकती है। इन दोनों के लिए पांच-छह सीटें पर्याप्त होंगी। फिर भी वीआईपी की महत्वाकांक्षा आड़े आएगी। वह 60 सीटों के साथ उपमुख्यमंत्री का पद भी मांग रही।
पिछली बार एनडीए में रहते हुए वीआईपी 11 सीटों पर मैदान में थी। चार पर विजयी रही। यह स्ट्राइक रेट अगर बहुत बेहतर नहीं, तो कमतर भी नहीं। हालांकि, इस बार लोकसभा चुनाव में इंडिया गठबंधन में अपने हिस्से की वह तीनों सीटें हार गई। इसी आधार पर राजद उसे साधना चाहेगा। एक लोकसभा क्षेत्र में विधानसभा की औसतन छह सीटें होती हैं। इस तरह वीआईपी की दावेदारी 18 सीटों की बन रही।
उपहार में कुछ प्रत्याशियों के साथ 15 सीटों तक राजद को कोई आपत्ति नहीं। उसके अधिक पर मुश्किल होगी, क्याेंकि इस आधार पर कांग्रेस की दावेदारी 54 सीटों की बनेगी, जबकि वह लोक सभा की नौ सीटों पर लड़कर तीन पर विजयी रही है, इसलिए वह नहीं चाहेगी कि इस पैमाने पर उसे वीआईपी के बरअक्श आंका जाए। तब कांग्रेस को 2020 का स्ट्राइक रेट दिखाया जाएगा।
इस आईने में लोकसभा चुनाव में राजद का चेहरा धुंधला पड़ जाता है। तो फिर लॉटरी वामदलों, विशेषकर माले, के हाथ लगती है, जिनका प्रदर्शन विधानसभा के साथ लोकसभा चुनाव में भी संतोषजनक रहा है। हालांकि, अपने बूते चुनावी मैदान में वामदल भी बेदम रहे हैं। अभी समग्रता में तीनों वामदल लगभग 85 सीटों की अपेक्षा पाले हुए हैं।
विधानसभा में सीटें 243 ही हैं, जिनमें से 144 पर पिछली बार राजद चुनाव लड़ा था। महागठबंधन का वह मजबूत स्तंभ है। लिहाजा यहां बहुत कमी होने से रही। कुछेक राजद से और बाकी कांग्रेस से सीटें लेकर ही सभी घटक दलों की इच्छा पूरी होनी है। ऐसे में इंडिया गठबंधन की रणनीति साफ है। सीटें जीत की संभावना के आधार पर बांटी जाएंगी और पिछले चुनावों में कमजोर प्रदर्शन वाली सीटों की अदला-बदली भी होगी।
