प्रशान्त बातें अच्छी करते हैं लच्छेदार। लच्छा कुछ ज़्यादा बना देते हैं। जिससे टेस्ट ख़त्म हो जाता है। यानि रिपीट बहुत है। हमने ये किया, हमने वो किया! उसको जिताया, उसको हराया…सब जानते हैं भैया! अब स्टीरियो बजाने की ज़रूरत नहीं है। क्रेडिट लेना भी उनकी आदत में शुमार है। बड़ा आदमी कभी क्रेडिट नहीं लेता, देता है।
– राजनीतिक विश्लेषण –
पटना स्टेट डेस्क। प्रशान्त अच्छे आदमी हैं, मेहनती हैं। स्टैमिना ग़ज़ब का है। दिन भर मीटिंग करते हैं। खेत-खलियान में, पानी-बुंद में दौड़ते-फिरते हैं। बदलाव का एक माहौल बनाया है। अच्छे रणनीतिकार हैं। राजनैतिक-वैचारिक रूप से थोड़ा भटकाव है। ख़ुद को सबसे ज़्यादा क़ाबिल मानते हैं। यह भी दिक़्क़त है। किसी दूसरे की सुनते नहीं। ऐसा शख़्स या तो अहंकारी होता है या ख़ुशामदपरस्त यानि अपनी तारीफ़ सुनने वाला।
एक बार अभिनेता मनोज वाजपेयी की मां ने उनसे कहा ‘जेकरा उ सब नई खे मिलल जे तोहरा मिलल बा, उ गधा न होला बा’ यानि सफलता-असफलता के आधार पर क़ाबिलियत को नहीं मापा जा सकता है। हो सकता वो आपसे ज़्यादा क़ाबिल हो, मुक़ाम नहीं मिला। प्रशान्त बातें अच्छी करते हैं लच्छेदार। लच्छा कुछ ज़्यादा बना देते हैं। जिससे टेस्ट ख़त्म हो जाता है। यानि रिपीट बहुत है। हमने ये किया, हमने वो किया! उसको जिताया, उसको हराया…सब जानते हैं भैया! अब स्टीरियो बजाने की ज़रूरत नहीं है। क्रेडिट लेना भी उनकी आदत में शुमार है। बड़ा आदमी कभी क्रेडिट नहीं लेता, देता है।
अब जैसे NRC जन आंदोलन से रुका। आज़ादी के बाद इतना बड़ा आंदोलन हुआ। देश भर में 267 जगह पर अल्पसंख्यकों ने धरना दिया। प्रशान्त कहते हैं NRC इलेक्शन से रुका। बंगाल में ममता को नहीं जिताते तो NRC नहीं रुकता। मतलब अल्पसंख्यक ज़ीरो है। आंदोलन से कुछ नहीं हुआ? देश में हर साल इलेक्शन होता है, क्या व्यवस्था बदल गयी? लोकतंत्र में आंदोलन एक बड़ा हथियार है।
दरअसल, प्रशान्त की किचेन कैबिनेट चापलूसों से घिरी हुई है। यस सर, नो सर! पटना के कुछ तोपची पत्रकार भी हैं, जो दरबार सजाते हैं। उन्हें राजनीति का ’र’ पता नहीं है। ये वहीं हैं जो 2020 के विधानसभा में पप्पू यादव को सत्ता दिला रहे थे। सभी जगह ज़मानत ज़ब्त हो गयी। ऐसी कि एक पार्टी के सुप्रीमो से निर्दल हो गए। ख़ुदा ख़ैर करे प्रशान्त का! इस चुनाव में ये लोग क्या करते हैं उनके साथ? हमारी तो शुभकामना है। प्रशान्त आप अच्छे आदमी हैं। टोन और तेवर थोड़ा सॉफ़्ट करें। समीक्षा की आदत डालें। आत्म-आलोचना और आत्म समीक्षा सफलता की ज़ीनत है। आप एक सलाह के करोड़ रुपया लेते हैं। मैं ऐसे ही देता हूं। जनहित में… आप आदमी अच्छे हैं!

माननीय नीतीश कुमार जी भी तो कहते हीं रहते हैं! की rcp सिंह जी को बनाया उपेंद्र कुशवाहा, मांझी जी इत्यादि को बनाया ये क्यों नहीं लिखते
True
दूध और शराब में कौन ख़राब हैं, बताने की आवश्यकता नहीं हैं।
चोर और बेईमान में कौन ख़राब हैं बताने की आवश्यकता नहीं हैं।
मरने के बाद कोई यहाँ से कुछ भी नहीं ले गया, लेकिन अपने नालायक बच्चों के लिए अथाह जमा करना चाहता हैं, जिसकी आजादी हम सब जनता दें रहे हैं, अन्यथा जागरूक जनता JDU, RJD, BJP, LJP, TMC, BJD etc ko नहीं किसी ईमानदार व्यक्ति को जिताती।
समय अभी भी की ईमानदार लोगों की छवि को पब्लिक प्लेटफार्म पर उभारा जाय।