पटना में सशस्त्र अपराधियों ने गुरुवार को पारस हॉस्पिटल में घुस कर गैंगस्टर चंदन मिश्रा को गोलियों से भून डाला। इस अति सुरक्षित हॉस्पिटल में दिनदहाड़े हुई हत्या ने राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था पर कई सवाल खड़े किए हैं। इस हत्या के बाद एडीजी कुंदन कृष्णन का काफी हैरतअंगेज बयान सामने आया है।
-पंचमुखी न्यूज़-
पटना स्टेट डेस्क। पटना के पारस अस्पताल में घुसकर इलाजरत गैंगस्टर चंदन मिश्रा की हत्या के बाद एडीजीपी कुंदन कृष्णन का एक बयान आया है जो काफी हैरत में डालने वाला है। उन्होंने मीडिया के समक्ष अपराध के सवाल को किसानों से जोड़ दिया है। बिहार में बढ़ते क्राइम ग्राफ पर उन्होंने कहा है कि अप्रैल, मई, जून में किसानों के पास काम नहीं होता उस समय ज्यादा मर्डर होते हैं। चार जुलाई को गोपाल खेमका हत्या कांड के बाद पटना में एक के बाद एक मर्डर ने बिहार पुलिस की नींद उड़ा दी है। एडीजीपी के इस बयान पर सियासत शुरू हो गई है। राजद प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव ने कहा है कि उनका यह बयान बिहार के आम आवाम को निराश करने वाला है।
कुंदन कृष्णन ने कहा है कि राज्य में हाल के दिनों हत्या कांडों को अंजाम दिया गया है। वर्षों से मई और जून में ज्यादा हत्याएं होती आई हैं। अप्रैल, मई और जून में जबतक बरसात नहीं होती है तबतक यह सिलसिला जारी रहता है क्योंकि ज्यादातर किसानों को कोई काम नहीं रहता। बरसात होने के बाद कृषक समाज के लोग लोग व्यस्त हो जाते हैं तो घटनाएं कम हो जाती हैं। उन्होंने कहा है कि चुनावी साल में हो रही हत्या की घटनाएं ज्यादा चर्चा में हैं।
एडीजीपी ने कहा कि पैसों के लिए युवा पीढ़ी सुपारी किलिंग में फंस रही है। तो उन पर काबू करने के लिए नए सेल का गठन किया गया है। यह सेल राज्य के सभी जिलों से कॉन्ट्रैक्ट किलर का इन्फॉर्मेशन इकट्ठा कर रहा है। डाटाबेस बनाकर काम किया जाएगा और कॉन्ट्रैक्ट किलरों से निपटा जाएगा। सुपारी सेल में किलर का फोटो, नाम, पता समेत तमाम जानकारी एकत्र करके रखी जाएगी और उनपर गहराई से काम किया जाएगा।
एडीजीपी के बयान पर राजद प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव ने कहा है कि कुंदन कृष्णन अपनी नहीं बल्कि सरकार द्वारा जो लिखकर दिया गया है उसे पढ़ते नजर आए। राज्य के किसानों को अपराधी बताया जा रहा है। यह बात बहुत शर्मनाक है। डीजीपी को इस पर संज्ञान लेना चाहिए।

ए डी जी श्रीमान कुंदन कृष्णा जी का बढ़ते हुए अपराध के संबंध को किसानों से जोड़ा जाना दुर्भाग्यपूर्ण है एक किसान होने के नाते उनके इस बयान से बहुत पीड़ा हुई
अपने प्रखंड के निवासी हैं, लेकिन इस प्रकार का बयान देना अति दुर्भाग्य पूर्ण था जबकि इन्होने इस कांड में सफलता भी प्राप्त किये, इनका सामाजिक परिवार से नाता रहा हैं, अब इन्होने गलती स्वीकार भी कर लिए। कोई बात नहीं। अन्नदाता सभी को माफ कर देते हैं, भले उनका कोई हानि हो जाय।