- स्पेशल रिपोर्ट –
पटना/बिहार। बिहार में जमीन के खेल का ऐसा खुलासा हुआ है, जिसने भू-माफिया नेटवर्क की पूरी तस्वीर सामने ला दी है। गुंडागर्दी, डर और कथित फर्जीवाड़े के दम पर करोड़ों की जमीन जुटाने के आरोपों में घिरे गुड्डू यादव और संतोष डॉन की संपत्तियों पर अब जब्ती की तलवार लटक रही है। आर्थिक अपराध इकाई यानी EOU ने कार्रवाई तेज कर दी है और अपराध से अर्जित बताई जा रही संपत्तियों की कुर्की-जब्ती के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की तैयारी है।
31 केस वाला ‘संतोष डॉन’, 75 से ज्यादा संपत्तियों का खेल!
EOU के मुताबिक पटना और नालंदा के संतोष कुमार उर्फ संतोष डॉन के खिलाफ अलग-अलग थानों में 31 मामले दर्ज हैं। जांच एजेंसी का दावा है कि उसके गिरोह ने पिछले करीब 8 वर्षों में 75 से अधिक परिसंपत्तियों का निबंधन कराया और इनकी कुल कीमत 13.30 करोड़ रुपये से ज्यादा बताई गई है। 13 जून 2026 को EOU ने संतोष डॉन समेत गिरोह के 25 अन्य आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज किया था।
गुड्डू यादव पर 39 केस, 29 संपत्तियां और 61 दस्तावेज!
जमुई के सिकंदरा निवासी गुड्डू यादव उर्फ गुड्डू राय भी जांच एजेंसी के निशाने पर है। EOU के अनुसार जमुई, नवादा और लखीसराय के विभिन्न थानों में उसके खिलाफ 39 मामले दर्ज हैं। इनमें 27 मामलों में चार्जशीट दाखिल हो चुकी है, जबकि 6 मामलों में कोर्ट संज्ञान ले चुका है। 28 जुलाई 2026 को गुड्डू यादव और उसके 17 सहयोगियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर छापेमारी की गई। जांच में गुड्डू यादव और उसकी पत्नी के नाम पर 29 संपत्तियों के दस्तावेज मिलने की बात कही गई है। वहीं सहयोगियों और उनके परिजनों के नाम पर 61 दस्तावेज भी जांच के दायरे में आए हैं।
‘जमीन नहीं बेचोगे तो केस में फंसोगे?’
EOU का आरोप है कि गिरोह जमीन मालिकों पर दबाव बनाने के लिए डराने-धमकाने, विवाद खड़ा करने और मुकदमों में उलझाने जैसी कथित रणनीतियों का इस्तेमाल करता था। जांच एजेंसी के मुताबिक राजस्व रिकॉर्ड में हेरफेर कराने के लिए राजस्व कर्मचारी कार्यालयों में अवैध रूप से मुंशी का काम करने वाले लोगों की मदद भी ली गई।
आरोप है कि पहले फर्जी विक्रेता खड़ा कर दस्तावेज तैयार कराए जाते, फिर असली जमीन मालिक को विवाद में उलझाया जाता और दबाव बनाकर जमीन औने-पौने दाम पर खरीदने की कोशिश की जाती थी।
सरकारी कीमत 7.50 करोड़, निबंधन सिर्फ 2.60 करोड़?
EOU के अनुसार गुड्डू यादव ने जमुई निबंधन कार्यालय में जिन 29 दस्तावेजों का निबंधन कराया, उनका सरकारी मूल्य करीब 7.50 करोड़ रुपये था। जांच एजेंसी का दावा है कि इनका निबंधन करीब 2.60 करोड़ रुपये में कराया गया। इसके अलावा सहयोगियों और उनके परिजनों के नाम पर दर्ज 61 दस्तावेजों का सरकारी मूल्य करीब 6.65 करोड़ रुपये बताया गया है, जिनका निबंधन कथित तौर पर इससे कम मूल्य पर कराया गया।
अब संपत्ति पर चलेगा EOU का ‘हथौड़ा’!
सबसे बड़ा सवाल अब यही है—क्या अपराध से अर्जित बताई जा रही इन करोड़ों की संपत्तियां सच में जब्त होंगी? EOU अब BNSS की धारा 107 के तहत कोर्ट में आवेदन देने की तैयारी में है। यानी जांच आगे बढ़ी तो जमीन और संपत्ति के दस्तावेजों से लेकर उनकी कुर्की-जब्ती तक की कार्रवाई बड़ा मोड़ ले सकती है।हालांकि, ये सभी आरोप जांच एजेंसी की FIR और जांच में सामने आए दावों पर आधारित हैं। अंतिम सत्य अदालत में साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही तय होगा।
बिहार में जमीन के खेल पर EOU की यह कार्रवाई अब कितनी दूर तक जाएगी—और इस नेटवर्क से जुड़े कितने चेहरे बेनकाब होंगे, यही देखने वाली बात होगी।
