-डॉ अरुण कुमार मयंक-
पटना/ लखनऊ डेस्क। अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी ने अब बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक तूफान खड़ा कर दिया है। SIT की शुरुआती रिपोर्ट में ऐसा खुलासा हुआ है जिसने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 45 दिन की CCTV फुटेज में आरोपी करीब 70 बार नोटों की गड्डियां उड़ाते दिखाई दिए। रिपोर्ट में सुरक्षा नियमों की धज्जियां उड़ाने, निगरानी में भारी लापरवाही और सिस्टम की बड़ी नाकामी उजागर हुई है। हालांकि ट्रस्ट के महासचिव और कोषाध्यक्ष का नाम रिपोर्ट में नहीं होने से नया विवाद भी शुरू हो गया है। अंतिम रिपोर्ट अभी बाकी है, इसलिए आने वाले दिनों में और बड़े खुलासों की संभावना जताई जा रही है।
45 दिन…70 बार चोरी, CCTV ने खोल दी पूरी पोल:
राम जन्मभूमि मंदिर के चढ़ावा चोरी मामले में गठित विशेष जांच दल (SIT) की प्रारंभिक रिपोर्ट में सनसनीखेज खुलासे हुए हैं। जांच के दौरान उपलब्ध 45 दिन की CCTV फुटेज में मुख्य आरोपी राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव और उसके सहयोगियों को करीब 70 बार नोटों की गड्डियां चोरी करते देखा गया। इससे पहले की फुटेज उपलब्ध नहीं होने के कारण यह पता नहीं चल सका कि चोरी कब से चल रही थी और कुल कितनी रकम गायब हुई।
सुरक्षा नियम बने मजाक, इसी का मिला चोरों को फायदा:
रिपोर्ट में कहा गया है कि चढ़ावे की गणना के दौरान लागू सुरक्षा नियमों का पालन ही नहीं किया गया। कर्मचारियों की तलाशी नहीं हुई, ड्रेस कोड लागू नहीं किया गया, निजी सामान पर रोक नहीं लगी, दान पेटियों की अलग-अलग रिकॉर्डिंग नहीं हुई और CCTV की लाइव मॉनिटरिंग भी नहीं की गई। SIT का साफ कहना है कि यदि इन नियमों का पालन होता तो चोरी रोकी जा सकती थी।
6 फरवरी 2025 का SOP क्यों हुआ कमजोर?
SIT ने खुलासा किया कि 6 फरवरी 2025 को चढ़ावे की गणना को सुरक्षित बनाने के लिए सख्त SOP लागू किया गया था। इसमें एंट्री, ड्रेस कोड और तलाशी जैसे कई सुरक्षा प्रावधान शामिल थे। लेकिन बाद में इन्हें कमजोर कर दिया गया। रिपोर्ट में कहा गया है कि आखिर किन परिस्थितियों में ये बदलाव किए गए, इसकी विस्तृत जांच अभी बाकी है।
टिन्नू यादव बना मास्टरमाइंड, भतीजे के साथ रची साजिश:
रिपोर्ट के मुताबिक मुख्य आरोपी राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव के पास दान पेटियों की चाबियां रहती थीं, जबकि इसके लिए उसे ट्रस्ट की ओर से कोई औपचारिक अधिकार नहीं मिला था। उसने अपने भतीजे मनीष यादव को ट्रस्ट में नौकरी दिलवाई और चढ़ावे की गिनती में तैनात कराया। इसके बाद दोनों ने मिलकर कथित तौर पर चढ़ावे की रकम उड़ाई।
निगरानी में लापरवाही पर भी उठे सवाल:
SIT ने ट्रस्ट सदस्य अनिल मिश्रा की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं। रिपोर्ट के अनुसार उन्हें चढ़ावा प्रबंधन की जिम्मेदारी दी गई थी, लेकिन प्रभावी निगरानी नहीं हो सकी। वहीं गणना प्रभारी सुभाष श्रीवास्तव के खिलाफ भी कार्रवाई की गई है क्योंकि चोरी उनकी मौजूदगी में हुई।
45 दिन की CCTV स्टोरेज पर भी सवाल:
SIT ने मंदिर जैसी संवेदनशील जगह पर सिर्फ 45 दिन की CCTV रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखने को बड़ी चूक बताया है। पहले 180 दिन तक फुटेज सुरक्षित रखने का सुझाव दिया गया था, लेकिन इसे लागू नहीं किया गया। इसी वजह से पुराने रिकॉर्ड नहीं मिल सके और जांच प्रभावित हुई।
बैंक और सिस्टम दोनों पर सवाल:
रिपोर्ट में बैंक प्रतिनिधियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। गणनाकर्मियों को निर्धारित वेशभूषा नहीं दी गई, नियमों का पालन नहीं कराया गया और अधिकारियों का नियमित रोटेशन भी नहीं हुआ। SIT का मानना है कि संस्थागत स्तर पर कई गंभीर लापरवाहियों ने चोरी का रास्ता आसान बनाया।
अभी बाकी है सबसे बड़ा खुलासा!
फिलहाल यह केवल SIT की प्रारंभिक रिपोर्ट है। अंतिम रिपोर्ट में प्रशासनिक जवाबदेही, संस्थागत विफलताओं, जिम्मेदार अधिकारियों और सुधारात्मक उपायों पर विस्तृत खुलासे होने की संभावना है। इसी वजह से पूरे मामले पर सभी की निगाहें अब अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हैं।
