- डॉ अरुण कुमार मयंक –
पटना डेस्क। बिहार के सासाराम में भ्रष्टाचार के खिलाफ निगरानी विभाग ने ऐसा बड़ा एक्शन लिया है, जिसने पूरे राजस्व महकमे में भूचाल ला दिया। सदर अंचल के सीओ आकाश रौनियार को तीन लाख रुपये घूस लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया गया। चौंकाने वाली बात यह है कि रिश्वत की यह रकम किसी आम आदमी से नहीं, बल्कि अपने ही राजस्व कर्मचारी से मांगी गई थी। आठ लाख की डिमांड, छह लाख में सेटिंग और पहली किस्त लेते ही निगरानी टीम ने ऐसा जाल बिछाया कि पूरा खेल खत्म हो गया। सीओ के साथ उसका निजी कर्मी और एक सरकारी लिपिक भी गिरफ्त में हैं।
मोरसराय स्थित आवास बना था ‘घूस कलेक्शन सेंटर’!
सूत्रों के मुताबिक, सदर सीओ आकाश रौनियार म्यूटेशन और परिमार्जन के मामलों में मोटी रकम वसूलने के लिए बदनाम थे। आरोप है कि हर फाइल को आगे बढ़ाने के लिए लाखों रुपये की मांग की जाती थी। वाद संख्या 4499/25-26 के परिमार्जन मामले में सीओ ने पहले आठ लाख रुपये रिश्वत मांगी। बाद में मामला छह लाख पर तय हुआ। तय योजना के अनुसार पहली किस्त के रूप में तीन लाख रुपये शुक्रवार को देने थे। राजस्व कर्मचारी राकेश कुमार रुपये लेकर शिवसागर थाना क्षेत्र के मोरसराय स्थित सीओ आवास पहुंचे। लेकिन उन्हें क्या पता था कि निगरानी विभाग पहले से पूरी तैयारी में बैठा है।
जैसे ही सोनू ने पकड़े नोट… वैसे ही दबोच ली गई पूरी गैंग!
निगरानी विभाग के डीएसपी पवन कुमार ने बताया कि सीओ ने सीधे पैसे लेने के बजाय अपने निजी कर्मी सोनू कुमार को आगे किया था। जैसे ही सोनू कुमार ने तीन लाख रुपये हाथ में लिए, निगरानी टीम ने उसे मौके पर ही धर दबोचा। इसके तुरंत बाद सीओ आकाश रौनियार को भी गिरफ्तार कर लिया गया। बताया जा रहा है कि निगरानी टीम ने पूरे ऑपरेशन की रिकॉर्डिंग पहले ही कर ली थी और पर्याप्त साक्ष्य जुटा लिए थे।
11 मई की शिकायत बनी सीओ के पतन की वजह
पीड़ित राजस्व कर्मचारी राकेश कुमार ने 11 मई 2026 को निगरानी विभाग में लिखित शिकायत दी थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि सीओ लगातार रिश्वत मांग रहे हैं और रकम नहीं देने पर कार्रवाई की धमकी दे रहे हैं। निगरानी विभाग ने शिकायत का सत्यापन कराया। जांच में आरोप सही पाए गए, जिसके बाद ट्रैप बिछाया गया और शुक्रवार को पूरा खेल खत्म हो गया।
म्यूटेशन के नाम पर चलता था ‘रेट कार्ड’?
सूत्रों के अनुसार, सासाराम अंचल कार्यालय में लंबे समय से रिश्वत का कथित नेटवर्क सक्रिय था। आरोप है कि हर म्यूटेशन मामले में 50 हजार रुपये तक की मांग की जाती थी। अगर कोई कर्मचारी या आम आदमी पैसा देने में आनाकानी करता, तो उसकी फाइल रोक दी जाती या कार्रवाई की धमकी दी जाती थी। सीओ पर आरोप है कि उन्होंने सरकारी व्यवस्था को ही कमाई का जरिया बना लिया था।
एक ही दिन में दो बड़े शिकंजे, स्वास्थ्य विभाग भी दागदार
निगरानी विभाग की दूसरी टीम ने सिविल सर्जन कार्यालय के लिपिक सतीश कुमार को भी 20 हजार रुपये रिश्वत लेते गिरफ्तार किया। आरोप है कि संझौली पीएचसी में कार्यरत अकाउंटेंट सुनीता कुमारी से पदस्थापन के नाम पर घूस मांगी जा रही थी। इस कार्रवाई के बाद जिले के कई सरकारी कार्यालयों में अफरा-तफरी मच गई। अधिकारी और कर्मचारी पूरे दिन सहमे नजर आए।
गिरफ्तारी के बाद जिले में चर्चाओं का बाजार गर्म
सीओ और उनके निजी कर्मी की गिरफ्तारी की खबर आग की तरह पूरे जिले में फैल गई। आम लोगों के बीच चर्चा है कि लंबे समय से म्यूटेशन और परिमार्जन के नाम पर खुलेआम वसूली हो रही थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो रही थी।
अब निगरानी विभाग की इस बड़ी कार्रवाई के बाद कई और अधिकारियों-कर्मचारियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। जांच एजेंसियां पूरे नेटवर्क की पड़ताल में जुट गई हैं।
