
- डॉ अरुण कुमार मयंक –
बिहारशरीफ डेस्क। भारतीय स्वतंत्र शिक्षण संघ की नालंदा जिला इकाई की बैठक भगवान बुद्ध हाई स्कूल, कल्याणपुर में आयोजित हुई। बैठक में जिला कार्यकारिणी के साथ विभिन्न प्रखंडों के निजी विद्यालय प्रतिनिधियों ने भाग लिया और शिक्षा विभाग की नीतियों पर खुलकर चर्चा की। बैठक में आरटीई के तहत प्रथम वर्ग में निःशुल्क नामांकन, ज्ञानदीप पोर्टल, कई सत्रों से लंबित प्रतिपूर्ति राशि, विद्यालयों की प्रस्वीकृति व नवीनीकरण, यू-डायस, ईएसआईसी तथा सदस्यता नवीनीकरण से जुड़ी समस्याओं को प्रमुखता से उठाया गया।
गिरियक प्रखंड अध्यक्ष प्रसिद्ध नारायण ने कहा कि प्रतिपूर्ति राशि का सत्रबद्ध भुगतान नहीं होने से निजी विद्यालय आर्थिक संकट में हैं। उन्होंने कहा कि समय पर भुगतान नहीं हुआ तो आरटीई नियमों से निजी विद्यालयों को मुक्त किया जाए। राजगीर प्रखंड सचिव राजन सिन्हा ने प्रस्वीकृति व नवीनीकरण प्रक्रिया को छोटे निजी विद्यालयों के लिए शोषणकारी बताया।
परवलपुर प्रखंड अध्यक्ष रुदल सिंह ने कहा कि संगठनों की अधिकता के कारण निजी विद्यालयों की एकजुटता कमजोर हुई है। एक मंच पर आकर सरकार से संवाद ही समाधान है। पश्चिमी जोन, बिहारशरीफ के सचिव स्मित बब्बर ने चेतावनी दी कि शिक्षा विभाग की नीतियों के कारण छोटे निजी विद्यालय बंद होने की कगार पर हैं। संगठन के संयुक्त सचिव अमित कुमार ने कहा कि ईएसआईसी का दबाव छोटे विद्यालयों के लिए घातक है, क्योंकि अधिकांश शिक्षक मानदेय पर कार्यरत हैं। जिलाध्यक्ष मो. जाहिद अनवर ने सरकार से निजी विद्यालयों की व्यावहारिक मजबूरियों को समझते हुए नियम बनाने की मांग की।
संरक्षक अरुण कुमार सिंह ने कहा कि विभिन्न पोर्टलों का बोझ विद्यालय संचालन को कठिन बना रहा है। यदि सरकार को आंकड़ों की आवश्यकता है तो अपने खर्च पर कर्मचारियों की नियुक्ति करे।
विंद प्रखंड अध्यक्ष राजीव कुमार ने विभागीय कार्यशैली पर कटाक्ष करते हुए कहा कि निजी विद्यालयों से जबरन गैर-शैक्षणिक कार्य कराए जा रहे हैं। संरक्षिका रेखा भारती ने कहा कि ज्ञानदीप पोर्टल के कारण ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चे आरटीई के लाभ से वंचित हो रहे हैं। जिला सचिव रंजीत कुमार ने निःशुल्क नामांकन प्रक्रिया की जानकारी देते हुए निजी विद्यालयों से प्रचार-प्रसार का आह्वान किया।
सभा को संबोधित करते हुए संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सह नालंदा कार्य प्रभारी ने कहा कि निजी विद्यालयों की समस्याओं का समाधान एकीकृत संगठन से ही संभव है। उन्होंने बताया कि 14 जनवरी को अपर मुख्य सचिव, शिक्षा विभाग के साथ संगठनों के प्रतिनिधियों की बैठक प्रस्तावित है। साथ ही राज्य में निजी विद्यालय आयोग के गठन की मांग दोहराई गई। बैठक में सैकड़ों विद्यालय प्रतिनिधियों की उपस्थिति रही, जिससे निजी विद्यालयों की एकजुटता और संघर्ष का संकल्प स्पष्ट रूप से सामने आया।

बहुत बेहतर एवं स्पष्ट लेखन पाठकों के लिए सुगम |
धन्यवाद