
- डॉ. अरुण कुमार मयंक –
पटना स्टेट ब्यूरो। नालंदा में जीत का जश्न था। मंच पर नेता थे। लेकिन मैदान में बगावत थी। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के गृह ज़िले नालंदा में जदयू की आभार सभा सियासी अखाड़े में बदल गई। सोगरा हाई स्कूल परिसर में शनिवार को ऐसा हंगामा मचा कि एनडीए की जीत का जश्न शर्मनाक तस्वीर बन गया। हाथापाई। गाली-गलौज। धक्का-मुक्की: करीब 30 मिनट तक खुलेआम बवाल चलता रहा। भीड़ बेकाबू थी। नेतृत्व बेबस।
नेताओं की अपील बेअसर, कार्यकर्ताओं ने नहीं मानी बात:
मंच से सांसद-विधायक बार-बार शांति की अपील करते रहे। लेकिन नाराज़ कार्यकर्ताओं ने किसी की नहीं सुनी। आपस में अपशब्द बोले गए। मंच के सामने ही रणक्षेत्र सज गया।
बुलावे पर बगावत, ‘तबज्जो’ बना टकराव की वजह:
विवाद की चिंगारी तब सुलगी, जब किसान प्रकोष्ठ के अस्थावां प्रखंड अध्यक्ष अनूप सिंह ने सवाल उठाया— “सभी प्रकोष्ठों के कार्यकर्ता क्यों नहीं बुलाए गए?” आरोप लगा— कुछ चुनिंदा लोगों को आगे किया गया। पुराने कार्यकर्ताओं की अनदेखी हुई। यही नाराज़गी मारपीट में बदल गई।
मंत्री-सांसद मौजूद, फिर भी हालात काबू से बाहर:
सभा में समाज कल्याण मंत्री मदन साहनी, झंझारपुर सांसद रामप्रीत मंडल, नालंदा सांसद कौशलेंद्र कुमार, हरनौत विधायक हरिनारायण सिंह, अस्थावां विधायक डॉ. जितेंद्र कुमार, इस्लामपुर विधायक रुहेल रंजन मौजूद थे। लेकिन इतनी बड़ी फौज भी कार्यकर्ताओं को शांत नहीं कर सकी। आख़िरकार कई नेता मंच छोड़कर चले गए। लंबे हंगामे के बाद जदयू जिलाध्यक्ष मोहम्मद अरशद ने मोर्चा संभाला। समझा-बुझाकर किसी तरह माहौल शांत कराया। इसके बाद दर्जनभर कार्यकर्ताओं को अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया गया। लेकिन तब तक सभा की साख पर सवाल उठ चुका था।
सांसद बोले—झगड़ा नहीं, नाराज़गी:
नालंदा सांसद कौशलेंद्र कुमार ने सफाई दी—“झगड़ा नहीं हुआ। कुछ लोग नाराज़ थे। यह पार्टी का आंतरिक मामला है।”
सवाल बड़ा है…
नीतीश कुमार के गृह ज़िले में अगर कार्यकर्ता ही बेलगाम हों, तो संगठन की हालत क्या है?
जीत के बाद जश्न नहीं, जदयू में जंग साफ दिखी।
नालंदा का यह दृश्य पार्टी की अंदरूनी कलह की सबसे तेज़ चेतावनी बन गया।
