
तेजस्वी यादव अकेले ही बिहार की यात्रा पर निकल गए हैं। अब प्रश्न है कि कांग्रेस से इतर इस ‘ बिहार अधिकार यात्रा’ की आवश्यकता क्यों पड़ी? राहुल गांधी और कांग्रेस ने वोटर अधिकार यात्रा में तेजस्वी को सीएम फेस घोषित नहीं किया। ऐसा तो नहीं कि इसी बात को लेकर तेजस्वी खिन्न हो गए और अकेले ही बिहार अधिकार यात्रा पर चल पड़े हैं..! या फिर बिहार में वोटर अधिकार यात्रा से कांग्रेस की बढ़ती लोकप्रियता से अंदर ही अंदर घबड़ा गए हैं..!
– राजनीतिक विश्लेषण –
पटना स्टेट डेस्क। राहुल गांधी के साथ ‘वोटर अधिकार यात्रा’ के बाद अब तेजस्वी यादव ‘बिहार अधिकार यात्रा’ पर निकले हैं। इसी क्रम में वह 10 जिले और 73 विधानसभा क्षेत्रों से गुजरेंगे। तेजस्वी यादव के मुताबिक वोटर अधिकार यात्रा में जो जिले छूट गए थे, वह 5 दिनों में उन्हीं जिलों को कवर करेंगे। वैसे तो सीधे तौर पर तो इस यात्रा का उद्देश्य सत्ता पक्ष (एनडीए) को चुनौती देना है लेकिन इसके पीछे आंतरिक राजनीति भी है। यानी इंडी गठबंधन के भीतर सीट बंटवारे से पहले अपनी राजनीतिक ताकत दिखाना है।
तेजस्वी ने अकेले क्यों निकाली यात्रा?: वरिष्ठ पत्रकार अरुण कुमार मयंक का मानना है कि ‘वोटर अधिकार यात्रा’ भले ही इंडिया गठबंधन की यात्रा थी लेकिन हकीकत यही थी कि इसका सारा श्रेय राहुल गांधी को मिला। इस यात्रा के बहाने राहुल ने बिहार में स्थूल हो चुकी कांग्रेस में नई ऊर्जा देने की कोशिश की। कुछ हद तक इसमें वह सफल भी रहे। उस यात्रा के दौरान तेजस्वी यादव नैपथ्य में नजर आए। यही कारण है कि आरजेडी की जिद के कारण रैली के रूप में उस यात्रा का समापन नहीं हो पाया। अब तेजस्वी यादव बिहार अधिकार यात्रा पर निकले हैं, ताकि कांग्रेस और बाकी घटक दलों पर प्रेशर बनाया जा सके।

क्या है यात्रा का एजेंडा?: इस यात्रा के दौरान तेजस्वी यादव ‘वोट चोरी’ के साथ-साथ जनता के बीच उन मुद्दों को भी उठा रहे हैं, जिन्हें वह लगातार कहते रहे हैं। पत्रकारों से बातचीत करते हुए तेजस्वी ने कहा कि ‘नया बिहार’ बनाने के लिए उन लोगों ने जो संकल्प लिया था, उसके बारे में जनता से संवाद कर रहे हैं। महंगाई और गरीब को हटाना, किसान और मजदूरों का सम्मान, मां और बहनों की सुरक्षा और बिहार में कल-कारखानों का अभाव जैसे मुद्दों को लेकर वह बिहार अधिकार यात्रा पर निकल पड़े हैं।
नीतीश के गढ़ में तेजस्वी: नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने अपनी यात्रा की शुरुआत जहानाबाद से की है। यात्रा के पहले दिन वह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सबसे मजबूत गढ़ नालंदा भी गए। नालंदा के इस्लामपुर और हिलसा में यात्रा के बाद उनका रथ पटना जिले के फतुहा पहुंचा, जहां पर उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। इसके बाद वह पटना लौट आए। यहां रात्रि विश्राम के बाद वह आज बेगूसराय के लिए निकलेंगे।

कहां-कहां जाएगी यात्रा?: तेजस्वी यादव की ‘बिहार अधिकार यात्रा’ पहले दिन यानी 16 सितंबर को जहानाबाद, नालंदा और फतुहा। दूसरे दिन यानी 17 सितंबर को बख्तियारपुर, बाढ़, मोकामा, बेगूसराय। 18 सितंबर को बेगूसराय, खगड़िया, सहरसा, मधेपुरा, 19 सितंबर को मधेपुरा, सहरसा, सिमरी बख्तियारपुर, रोसड़ा, उजियारपुर और समस्तीपुर और आखिरी दिन यानी 20 सितंबर को समस्तीपुर, ताजपुर, महुआ और हाजीपुर से गुजरेगी। 17 से 19 सितंबर तक तेजस्वी उसी जगह रात्रि विश्राम करेंगे, जहां उस दिन की यात्रा खत्म होगी।
‘महागठबंधन में ऑल इज नॉट वेल’: तेजस्वी यादव की बिहार अधिकार यात्रा निकालने पर जदयू प्रवक्ता नीरज कुमार का कहना है कि इंडिया गठबंधन में ऑल इज वेल नहीं है। गठबंधन के सभी घटक दल एक-दूसरे को नीचा दिखाने की कोशिश कर रहे हैं। पहले राहुल गांधी ने वोटर अधिकार यात्रा निकाली, अब उसके जवाब में तेजस्वी यादव भी बिहार अधिकार यात्रा निकाल रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि 70 सीट और डिप्टी सीएम पर कांग्रेस की दावेदारी से परेशान होकर तेजस्वी इस यात्रा पर जा रहे हैं।
