नालंदा जिला शिक्षा विभाग के लिपिक फणी मोहन पर अनेक आरोप हैं। फिर भी नए जिला शिक्षा पदाधिकारी बचाने में लगे हैं। लिपिक फणी मोहन पर राशि गबन का आरोप सिद्ध हुआ है। इस सम्बन्ध में रिपोर्ट मांगी गयी है। तत्कालीन डीईओ ने गड़बड़ी के आरोप में वेतन बंद कर विधि कार्य से बाहर कर दिया था।

– स्पेशल रिपोर्ट –
बिहारशरीफ डेस्क। अक्सर चर्चा में रहने वाला जिला शिक्षा विभाग इन दिनों फिर से सुर्खियों में है। इस बार यहां तैनात लिपिक फणी मोहन पर लगे गबन का आरोप सिद्ध हो गया है। लेकिन, इस लिपिक पर कई आरोप रहने के बावजूद अधिकारियों का चहेता बना बैठा है। इनके कई कार्यों का विवादों से गहरा लगाव रहा है।
गबन के नये मामले को गंभीरता से लेते हुए क्षेत्रीय शिक्षा उप निदेशक राज कुमार ने शोकॉज पूछते हुए एक सप्ताह के अंदर जवाब मांगा है। आरडीडीई कुछ दिनों पहले तक नालंदा जिले के जिला शिक्षा पदाधिकारी थे और उन्होंने लिपिक फणी मोहन को विधि कार्य में लापरवाही बतरने के आरोप में उनका वेतन बंद करते हुए संभाग बदल दिया था। सबसे हैरत की बात तो यह कि पिछले लिपिकों का डीडीसी के आदेश पर रैंडमाइजेशन के आधार पर बदलाव किया गया था। लेकिन, नए डीईओ ने उस आदेश को दरकिनार करते हुए आरोपित लिपिक को पहले वाले कार्य के साथ ही स्थापना जैसे अति संवेदनशील संभाग का जिम्मा सौंप दिया।
संचिका जमा न करने का भी है आरोप: जिला शिक्षा कार्यालय में पदस्थापित फणी मोहन पर बेनामी वाउचर के माध्यम से सरकारी राशि प्राप्त करने और संबंधित संचिका जमा न करने के आरोप लगे हैं। इस मामले में एक सप्ताह के भीतर बिंदुवार स्पष्टीकरण देने का निर्देश जारी किया गया है। इससे पहले 17 जुलाई 2025 को पत्रांक 1072 के माध्यम से फणी मोहन को मामले की वस्तुस्थिति बताने का आदेश दिया गया था। लेकिन, जवाब नहीं मिलने पर 25 जुलाई 2025 को पत्रांक 1114 द्वारा स्पष्टीकरण मांगा गया। जवाब में फणी मोहन ने तीनों वाउचर को न्यायालयीन मामले से असंबंधित बताया।
विभाग मान रहा गबन: नये पत्र में आरडीडीई ने स्पष्ट कहा है कि वाउचर संख्या 26/2023-24 को उन्होंने रामवृक्ष संस्कृत प्राथमिक सह मध्य विद्यालय मंडाछ (एकंगरसराय) की जांच से संबंधित बताया। जबकि, वाउचर संख्या 27/2023-24 और 29/2023-24 को विभागीय जांच रिपोर्ट व अन्य कार्यालयी कार्य के लिए फोटो कॉपी खर्च बताया है। हालांकि, इन वाउचर से जुड़ी संचिका प्रभारी लिपिक को सौंपी नहीं गई है। इससे वस्तुस्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई। जांच में प्रथमदृष्टया यह पाया गया कि बेनामी वाउचर प्रस्तुत कर सरकारी राशि ली गई, जो गबन का द्योतक है। साथ ही, संचिका जमा न करना कर्तव्य में लापरवाही का संकेत देता है।
गबन के और भी हैं आरोप: इस मामले के अलावा गायत्री देवी तेजस्वी फैन्स एसोसिएशन के सचिव ने 28 जुलाई 2025 को पत्रांक 27 के माध्यम से भी न्यायालयीन वाउचर की राशि अवैध रूप से लेने का आरोप लगाया है। शिकायत पत्र (कुल 114 पृष्ठ) की प्रति फणी मोहन को भेजते हुए सभी बिंदुओं पर एक सप्ताह के भीतर लिखित जवाब देने का आदेश दिया गया है। इसके अलावा कई अन्य व गंभीर आरोप भी लिपिक पर लगाये गये हैं।
नालंदा के जिला शिक्षा पदाधिकारी आनंद विजय के अनुसार लिपिक फणी मोहन पर लगे आरोप के संबंध में आरडीडीई ने गबन माना है। हालांकि, अब भी लिपिक को स्पष्टीकरण देने का मौका दिया गया है। अन्य आरोपों की भी जांच चल रही है। संभाग बंटवारे में किसी तरह की गड़बड़ी नहीं हुई है।
