- डॉ अरुण कुमार मयंक-
पटना/ बिहारशरीफ डेस्क। विधानसभा चुनाव से पहले जनता दल (यू) ने अपनी नई प्रदेश कमेटी का ऐलान कर साफ संकेत दे दिया है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के गृह जिला नालंदा को संगठन में पहले से भी ज्यादा राजनीतिक अहमियत दी जा रही है। प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा द्वारा घोषित नई टीम में नालंदा के नेताओं को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां देकर यह संदेश दिया गया है कि चुनावी रणनीति में नीतीश के गढ़ की भूमिका निर्णायक रहने वाली है। यही वजह है कि नालंदा से एक साथ 2 प्रदेश महासचिव, 4 प्रदेश सचिव और एक प्रकोष्ठ अध्यक्ष बनाकर संगठन में जिले की मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई गई है।
नई सूची में अरुण कुमार वर्मा और संजयकांत सिन्हा को प्रदेश महासचिव बनाया गया है, जबकि राजीव रंजन सिंह, रजनीश कुमार सिंह, विजय कुमार सिन्हा और गुलरेज़ अंसारी को प्रदेश सचिव की जिम्मेदारी मिली है। इसके अलावा विधान पार्षद रीना यादव को पंचायती राज प्रकोष्ठ का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है। यानी संगठन के अलग-अलग स्तरों पर नालंदा की भागीदारी को खास तवज्जो दी गई है। जदयू के जिलाध्यक्ष मो. अरशद व जिला अभियान प्रभारी संजय पासवान ने कहा है कि प्रदेश कमेटी में नालंदा की दमदार हिस्सेदारी, महासचिव से लेकर सचिव और प्रकोष्ठ अध्यक्ष तक बनाने से जिले का सियासी कद बढ़ा है तथा सभी नवनियुक्त पदाधिकारियों को हार्दिक बधाई दी है।
प्रदेश कमेटी में कुल 12 उपाध्यक्ष, 38 महासचिव, 74 सचिव, 15 प्रकोष्ठों के अध्यक्ष, 9 प्रदेश प्रवक्ता और प्रदेश कोषाध्यक्ष की घोषणा की गई है। ललन सरार्फ को एक बार फिर प्रदेश कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं उपाध्यक्ष के रूप में रमेश ऋषिदेव, महाबली सिंह, विनोद यादव, संजय सिंह, सुमित कुमार सिंह, मंजर आलम, कलाधर मंडल, प्रमिला कुमारी प्रजापति, ज्ञानचंद पटेल, मालती सिंह, किरण रंजन और परशुराम तत्वा को जिम्मेदारी मिली है।
प्रवक्ताओं की सूची में नीरज कुमार को फिर से मुख्य प्रवक्ता बनाया गया है। उनके साथ निहोरा प्रसाद यादव, भारती मेहता, नवल शर्मा, अभिषेक झा, शंभूनाथ सिंह, अनुप्रिया, चंदन कुमार सिंह और पूजा एंड शर्मा (पैट्रिक) को भी प्रदेश प्रवक्ता बनाया गया है।
प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने साफ कहा कि विधानसभा चुनाव और संगठन में बेहतर काम करने वाले नेताओं को प्राथमिकता दी गई है और आगे भी अच्छा प्रदर्शन करने वालों को मौका मिलेगा। इससे स्पष्ट है कि जेडीयू अब चुनावी मोड में पूरी तरह सक्रिय हो चुकी है।
राजनीतिक विश्लेषण: नालंदा को क्यों मिली इतनी बड़ी हिस्सेदारी?
जेडीयू की नई प्रदेश कमेटी सिर्फ संगठनात्मक फेरबदल नहीं, बल्कि विधानसभा चुनाव से पहले का राजनीतिक संदेश भी है। नालंदा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का गृह जिला होने के साथ-साथ जेडीयू की राजनीतिक पहचान का सबसे मजबूत केंद्र माना जाता है। ऐसे में यहां से सात नेताओं को अलग-अलग जिम्मेदारियां देकर पार्टी ने यह संकेत दिया है कि चुनावी अभियान का एक बड़ा आधार नालंदा ही रहेगा।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि जातीय और सामाजिक समीकरणों को साधते हुए नालंदा के अनुभवी और सक्रिय चेहरों को संगठन में जगह दी गई है। इससे एक ओर स्थानीय कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ेगा तो दूसरी ओर विपक्ष को भी स्पष्ट संदेश मिलेगा कि जेडीयू अपने सबसे मजबूत गढ़ को और मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है। हालांकि, कमेटी में कई पुराने दावेदारों को जगह नहीं मिलने से अंदरूनी नाराजगी की भी चर्चा है। अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि नई टीम चुनावी मैदान में संगठन को कितना मजबूत करती है और नालंदा से मिले इस बड़े प्रतिनिधित्व का राजनीतिक फायदा जेडीयू को कितना मिलता है।
पंचमुखी न्यूज़ का निष्कर्ष:
अब सबसे बड़ी चुनौती नई टीम के सामने संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने, कार्यकर्ताओं की नाराजगी को संभालने और सरकार की उपलब्धियों को जनता तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने की होगी। यदि नई प्रदेश कमेटी इन मोर्चों पर सफल रहती है, तो जेडीयू आगामी विधानसभा चुनाव में अपनी राजनीतिक स्थिति को मजबूत करने में बढ़त हासिल कर सकती है। वहीं, यदि संगठन के भीतर समन्वय और कार्यकर्ताओं का विश्वास बनाए रखने में चूक होती है, तो इसका असर चुनावी प्रदर्शन पर भी पड़ सकता है। ऐसे में नई कमेटी की सक्रियता, एकजुटता और चुनावी रणनीति ही तय करेगी कि यह बदलाव जेडीयू के लिए कितना लाभकारी साबित होता है..!
