
- नरेन्द्र प्रकाश –
मक्का/ सऊदी अरब। दुनिया भर के करोड़ों मुसलमानों के सबसे बड़े धार्मिक आयोजन हज को लेकर सऊदी अरब ने बड़ा फैसला लिया है। अब हज और बकरीद के दौरान मक्का में गाय और ऊंट की कुर्बानी पर रोक लगा दी गई है। हज यात्रियों को साफ निर्देश दिए गए हैं कि वे केवल भेड़ों की ही कुर्बानी दें। यह फैसला कोरोना महामारी के बाद लागू किया गया था, जिसे अब भी जारी रखा गया है। सरकार द्वारा संचालित ‘हादी और अदाही’ कार्यक्रम के महाप्रबंधक सेराज मोहम्मद अलफेलाली ने खुलासा किया कि 2019 में कोविड संकट के बाद बड़े जानवरों की कुर्बानी रोक दी गई थी। उनका कहना है कि हज के दौरान बढ़ती भीड़, सफाई व्यवस्था और आधुनिक प्रबंधन को देखते हुए यह कदम उठाया गया।
अब ऑनलाइन होगी कुर्बानी, SMS से मिलेगा मैसेज:
हज की पारंपरिक तस्वीर अब पूरी तरह बदल चुकी है। पहले जहां हज यात्री अपनी मौजूदगी में पारंपरिक तरीके से कुर्बानी करवाते थे, वहीं अब सबकुछ डिजिटल हो गया है। श्रद्धालु ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराते हैं, कुर्बानी की फीस जमा करते हैं और फिर मोबाइल मैसेज के जरिए उन्हें सूचना दी जाती है कि उनकी कुर्बानी कब पूरी हुई। बताया गया कि एक भेड़ की कुर्बानी के लिए करीब 720 सऊदी रियाल यानी भारतीय मुद्रा में लगभग 16 हजार रुपये तक खर्च करने पड़ते हैं।
एक दिन में लाखों भेड़ों की कुर्बानी, हाईटेक स्लॉटर हाउस बना आकर्षण:
मीना घाटी के पास लगभग 10 लाख वर्ग मीटर में फैला आधुनिक बूचड़खाना बनाया गया है, जहां हर साल औसतन 10 लाख भेड़ों की कुर्बानी दी जाती है। यहां जानवरों की मेडिकल जांच से लेकर मांस को डीप फ्रीजर में स्टोर करने तक पूरी प्रक्रिया मशीनों और आधुनिक तकनीकों से की जाती है।
20 विशाल डीप फ्रीजरों में मांस सुरक्षित रखा जाता है। अधिकारियों का दावा है कि पूरी प्रक्रिया इस्लामी नियमों के अनुसार ही की जाती है।
37 मुस्लिम देशों में भेजा जाता है कुर्बानी का मांस:
हज खत्म होते ही ‘हादी और अदाही’ कार्यक्रम के तहत कुर्बानी का मांस दुनिया के गरीब मुस्लिम देशों में भेजा जाता है। सऊदी अधिकारी संयुक्त राष्ट्र गरीबी सूचकांक को ध्यान में रखते हुए जरूरतमंद देशों का चयन करते हैं। जानकारी के मुताबिक, करीब 37 देशों में यह मांस भेजा जाता है ताकि गरीब मुस्लिम परिवारों तक मदद पहुंच सके।
अब नहीं दबेगा पशु कचरा, बनेगा बायो फ्यूल और खाद:
इतनी बड़ी संख्या में होने वाली कुर्बानी के बाद निकलने वाले पशु अवशेष और कचरे को लेकर भी सऊदी अरब ने बड़ा बदलाव किया है। मक्का में ‘मॉडल लाइवस्टॉक सिटी’ परियोजना शुरू की गई है, जिसके तहत जानवरों के अवशेषों को रीसायकल किया जाएगा। पुरानी तरह जमीन में कचरा दबाने की परंपरा अब खत्म की जा रही है। आधुनिक रेंडरिंग तकनीक से पशु अवशेषों को उपयोगी उत्पादों में बदला जाएगा।
धार्मिक परंपरा और टेक्नोलॉजी का नया संगम:
सऊदी अरब का यह कदम धार्मिक व्यवस्थाओं में आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल की बड़ी मिसाल माना जा रहा है। जहां एक तरफ लाखों हज यात्रियों की सुविधा और स्वच्छता पर जोर दिया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ पर्यावरण संरक्षण और डिजिटल प्रबंधन को भी प्राथमिकता दी जा रही है।
अब देखना होगा कि दुनिया भर के मुस्लिम देशों और धार्मिक संगठनों की इस बड़े बदलाव पर क्या प्रतिक्रिया सामने आती है।
