- डॉ अरुण कुमार मयंक –
पटना डेस्क। बिहार के नालंदा जिले से बुधवार को दिल दहला देने वाली खबर सामने आई। नगरनौसा प्रखंड के मध्य विद्यालय कैला में मिड-डे मील खाने के बाद करीब 50 से 60 बच्चों की अचानक तबीयत बिगड़ गई। बच्चों को उल्टी, दस्त, पेट दर्द और चक्कर आने लगे। कई मासूम बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़े। स्कूल परिसर में चीख-पुकार और अफरा-तफरी का माहौल बन गया। बताया जा रहा है कि बच्चों को दोपहर के भोजन में चावल और छोले की सब्जी परोसी गई थी। खाना खाने के कुछ ही मिनटों बाद बच्चे एक-एक कर बीमार पड़ने लगे। घटना के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई।
स्कूल से अस्पताल तक मचा कोहराम, रोते-बिलखते पहुंचे परिजन:
घटना के बाद आनन-फानन में सभी बच्चों को नगरनौसा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और चंडी रेफरल अस्पताल में भर्ती कराया गया। गंभीर हालत में एक छात्रा को बिहारशरीफ सदर अस्पताल रेफर किया गया है। जैसे ही अभिभावकों को सूचना मिली कि स्कूल का खाना खाने से बच्चे बीमार हो गए हैं, वैसे ही अस्पतालों में भारी भीड़ उमड़ पड़ी। माता-पिता अपने बच्चों को देखकर रोने-बिलखने लगे। अस्पताल परिसर में देर तक अफरा-तफरी का माहौल बना रहा।
‘खाने में दवा जैसी गोली थी’ — छात्रा का बड़ा आरोप
पांचवीं कक्षा की छात्रा अमृता कुमारी ने चौंकाने वाला दावा किया है। उसने बताया कि छोले-चावल में किसी दवा जैसी गोली दिखाई दी थी। इसके बावजूद बच्चों को खाना परोस दिया गया। अमृता ने कहा कि: “रोज की तरह इस बार शिक्षकों ने खाना चखकर नहीं देखा था। बाद में एक शिक्षक ने भोजन खाया तो उनकी भी तबीयत खराब हो गई।”बच्चों के बयान के बाद मामले ने और गंभीर रूप ले लिया है।
शिक्षक भी हुए बीमार, टेस्टिंग नहीं होने पर उठे सवाल
जानकारी के मुताबिक स्कूल के शिक्षक अमरेश सर ने भी बाद में वही भोजन खाया, जिसके बाद उन्हें भी चक्कर आने लगे और इलाज के लिए अस्पताल ले जाना पड़ा। इस घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर बिना टेस्टिंग के बच्चों को खाना कैसे परोस दिया गया? मिड-डे मील के नियमों के अनुसार भोजन परोसने से पहले शिक्षकों द्वारा टेस्टिंग जरूरी होती है।
ग्रामीणों का फूटा गुस्सा, बोले — ‘लापरवाही करने वालों को जेल भेजो’
घटना के बाद ग्रामीणों और अभिभावकों में भारी आक्रोश है। लोगों ने आरोप लगाया कि भोजन की गुणवत्ता की जांच किए बिना बच्चों को खाना परोस दिया गया। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि: पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो, दोषियों की पहचान की जाए, जिम्मेदार लोगों पर कड़ी कार्रवाई हो व भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो!
प्रधानाध्यापिका बोलीं — ‘भोजन शुरू होते ही बिगड़ने लगी हालत’
विद्यालय की प्रधानाध्यापिका रजनी कुमारी ने बताया: “मिड-डे मील में छोला और चावल परोसा गया था। भोजन शुरू होने के कुछ देर बाद बच्चों की तबीयत खराब होने लगी। कई बच्चों को उल्टी-दस्त होने लगे और कुछ बच्चे बेहोश हो गए। स्थिति गंभीर देखते हुए सभी को तुरंत अस्पताल भेजा गया।” उन्होंने बताया कि घटना की सूचना वरीय अधिकारियों को दे दी गई है।
जांच में जुटा शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग
घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग और शिक्षा विभाग की टीम सक्रिय हो गई है। मिड-डे मील के नमूने सुरक्षित रख लिए गए हैं और जांच शुरू कर दी गई है कि आखिर भोजन में क्या गड़बड़ी थी।
प्रखंड प्रमुख रंजू कुमारी ने कहा: “जो भी इस लापरवाही में शामिल होगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल कई बच्चे इलाजरत हैं और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।”
बिहार में फिर उठा मिड-डे मील की गुणवत्ता पर सवाल
नालंदा की इस घटना ने एक बार फिर बिहार में मिड-डे मील व्यवस्था की पोल खोल दी है। सवाल यह है कि आखिर मासूम बच्चों की जिंदगी के साथ कब तक खिलवाड़ होता रहेगा? स्कूलों में बच्चों को पौष्टिक भोजन देने की योजना अगर लापरवाही की भेंट चढ़ती रही, तो ऐसे हादसे भविष्य में और बड़े रूप ले सकते हैं। फिलहाल पूरा प्रशासन मामले की जांच में जुटा है, जबकि बच्चों के परिजन दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
