- डॉ अरुण कुमार मयंक –
पटना स्टेट ब्यूरो। बिहार में अब शहरी सड़कों को मनमाने तरीके से ऊंचा नहीं किया जा सकेगा। पथ निर्माण विभाग ने स्पष्ट कर दिया है—पहले अनुमति, फिर निर्माण। डॉक्यूमेंटेड स्वीकृति के बिना सड़क की सतह बढ़ाने पर पूरी तरह रोक। यह सख्त फैसला शहरों में बढ़ते जलजमाव और पटना हाईकोर्ट की नाराजगी के बाद लिया गया है। विभाग के अभियंता प्रमुख सह अपर आयुक्त की ओर से सभी संबंधित इंजीनियरों को कड़ा निर्देश जारी किया गया है।
हाईकोर्ट के निर्देश के बाद एक्शन:
पटना उच्च न्यायालय में दायर जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान शहरी इलाकों में सड़कों का स्तर बढ़ाने और खराब ड्रेनेज व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठे थे। कोर्ट ने साफ कहा था— सड़कें ऊंची करने से पहले वैज्ञानिक आकलन जरूरी। ड्रेनेज व्यवस्था दुरुस्त करना प्राथमिकता हो। कोर्ट की टिप्पणी के बाद विभाग ने नियमों को और कड़ा कर दिया है।
अब क्या-क्या बदलेगा?:
- टोपोग्राफिक सर्वे अनिवार्य: सड़क निर्माण या मरम्मत से पहले विस्तृत टोपोग्राफिक सर्वे कराया जाएगा। इलाके की प्राकृतिक ढाल, जल निकासी और आसपास के भवनों की ऊंचाई का पूरा अध्ययन होगा।
- रिपोर्ट के आधार पर ही काम: कार्यपालक अभियंता, सहायक अभियंता और कनीय अभियंता सुनिश्चित करेंगे कि सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक ही निर्माण या मरम्मत हो।
- क्वालिटी कंट्रोल की सख्त निगरानी: क्वालिटी कंट्रोल टीम सर्वे रिपोर्ट और निर्माण कार्य की जांच करेगी। किसी भी तरह की लापरवाही पर कार्रवाई संभव।
- मरम्मत का नया फॉर्मूला: अब सिर्फ ऊपर-ऊपर परत चढ़ाकर सड़क ऊंची नहीं की जाएगी। मरम्मत के दौरान ऊपरी और पुरानी परतों को हटाया जाएगा। नीचे की बेस लेयर से वैज्ञानिक तरीके से पुनर्निर्माण होगा।
- ड्रेनेज अनिवार्य: आबादी वाले क्षेत्रों और बाजारों में सड़कों के किनारे समुचित ड्रेनेज सिस्टम बनाना जरूरी। पानी रुकने की गुंजाइश नहीं छोड़ी जाएगी।
- फुटपाथ और रैम्प जरूरी: बाजार क्षेत्र में फुटपाथ या रैम्प का निर्माण अनिवार्य किया गया है। पैदल चलने वालों और दुकानदारों की सुविधा का भी ध्यान।
क्यों जरूरी पड़ा यह फैसला?:
पिछले कुछ वर्षों में शहरी इलाकों में सड़क मरम्मत के नाम पर बार-बार परत चढ़ाने से सड़कें आसपास के घरों और दुकानों से ऊंची हो गईं।
नतीजा—
बरसात में पानी सड़कों पर भरने लगा।
ड्रेनेज का प्राकृतिक बहाव बाधित हुआ।
घरों और दुकानों में पानी घुसने की घटनाएं बढ़ीं।
जनप्रतिनिधियों और आम लोगों की शिकायतें बढ़ती गईं।
मामला विधान परिषद तक पहुंचा।
विधान परिषद में भी गूंजा मुद्दा:
बुधवार को विधान परिषद में सदस्य अब्दुल बारी सिद्दिकी ने सड़कों को ऊंचा किए जाने से उत्पन्न जलजमाव का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा—गलत तरीके से मरम्मत से शहरों में स्थिति बिगड़ रही है।
जवाब में पथ निर्माण मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने कहा— ओपीआरएमसी-3 में इसके लिए विशेष प्रावधान किया जा रहा है। अब सड़कों की मरम्मत वैज्ञानिक पद्धति से होगी। ऊपरी परत हटाकर बेस लेयर से निर्माण सुनिश्चित किया जाएगा।
सरकार की मंशा साफ—
सड़क बने, लेकिन जलजमाव न हो।
इंजीनियरों की जवाबदेही तय:
विभाग ने स्पष्ट किया है कि किसी भी स्तर पर नियमों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
हर निर्माण में रोड प्रोफाइल का पालन अनिवार्य होगा।
फील्ड स्टाफ को नियमित प्रशिक्षण दिया जाएगा।
अब सड़क निर्माण सिर्फ बजट खर्च करने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि वैज्ञानिक और जवाबदेह व्यवस्था का हिस्सा होगा।
बड़ा संदेश:
बिहार में सड़क निर्माण के तौर-तरीकों में बड़ा बदलाव शुरू।
मनमानी पर रोक।
तकनीकी अनुशासन लागू।
जलजमाव पर सर्जिकल स्ट्राइक की तैयारी।
अगर नियम जमीन पर उतरे,
तो शहरों को मिल सकती है राहत।
