
- डॉ अरुण कुमार मयंक –
पटना ब्यूरो/ बिहारशरीफ डेस्क। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पैतृक क्षेत्र हरनौत में जदयू (JDU) के भीतर अब खुली बगावत के स्वर सुनाई देने लगे हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेता और नौ बार के विधायक हरिनारायण सिंह को लेकर जदयू कार्यकर्ताओं में गहरा असंतोष पनप रहा है। कार्यकर्ताओं ने साफ चेतावनी दी है कि अगर हरिनारायण सिंह या उनके पुत्र अनिल कुमार को टिकट दिया गया, तो वे चुनाव का विरोध करेंगे और “उम्मीदवार को हराने तक का अभियान” चलाएंगे।
‘परिवारवाद’ पर नीतीश की नीति, लेकिन हरनौत में उलटी तस्वीर?:
जदयू के कई स्थानीय कार्यकर्ताओं का आरोप है कि नीतीश कुमार जहां राज्यभर में परिवारवाद की राजनीति के खिलाफ बोलते हैं, वहीं उनके अपने क्षेत्र हरनौत विधानसभा में ठीक इसका उल्टा देखने को मिल रहा है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, पिछले चुनाव में हरिनारायण सिंह ने खुद चुनाव न लड़ने और बेटे को मौका देने की बात कही थी, लेकिन अंतिम समय में वे खुद मैदान में उतर गए। अब इस बार भी वे अपने पुत्र अनिल कुमार को टिकट दिलाने की कोशिश में हैं, जिससे पार्टी के निचले स्तर पर असंतोष और बढ़ गया है।
कार्यकर्ताओं की मांग : “हरनौत से खुद लड़ें नीतीश कुमार या फिर निशांत को उतारें”
हरनौत क्षेत्र के कार्यकर्ताओं ने नीतीश कुमार से साफ मांग की है कि “अगर वाकई पार्टी परिवारवाद के खिलाफ है, तो इस बार नीतीश कुमार खुद मैदान में उतरें, या फिर उनके पुत्र निशांत कुमार को हरनौत से उम्मीदवार बनाया जाए।” कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह सीट जदयू का अभेद्य गढ़ रही है, लेकिन जनता में अब बदलाव की मांग उठ रही है। ऐसे में पार्टी नेतृत्व को स्थानीय भावना का सम्मान करना चाहिए।
हरनौत में ‘सियासी भूचाल’, जदयू की रणनीति पर असर तय:
हरनौत से उठी यह बगावत जदयू के लिए एक गंभीर संकेत है। नीतीश कुमार के गृह क्षेत्र में असंतोष का यह स्वर पार्टी की छवि और रणनीति- दोनों पर असर डाल सकता है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि “अगर जदयू ने इस बगावत को समय रहते शांत नहीं किया, तो हरनौत की सीट पार्टी के लिए चुनौती बन सकती है।” हरनौत, जो अब तक नीतीश कुमार का अभेद्य गढ़ माना जाता था, वहां से अब अंदरूनी असंतोष का भूकंप जदयू की नींव हिला सकता है।
पृष्ठभूमि: हरिनारायण सिंह का लंबा राजनीतिक सफर-
हरिनारायण सिंह चंडी और हरनौत क्षेत्र से अब तक नौ बार विधायक रह चुके हैं। वे नीतीश कुमार के करीबी नेताओं में शुमार माने जाते हैं। पार्टी में उनका गहरा प्रभाव रहा है, लेकिन लगातार टिकट मिलने और परिवार को बढ़ावा देने को लेकर विरोध तेज हो गया है। अब कार्यकर्ता नई पीढ़ी के नेतृत्व और स्थानीय चेहरों को आगे लाने की मांग कर रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषण: ‘होम ग्राउंड’ पर नीतीश की परीक्षा-
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, हरनौत में जदयू की यह अंदरूनी कलह नीतीश कुमार के लिए सबसे बड़ा सियासी इम्तिहान बन सकती है। हरनौत न सिर्फ उनका गृह विधानसभा क्षेत्र है, बल्कि यही वह जगह है जहां से नीतीश कुमार ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की थी। अगर यहां बगावत थमी नहीं, तो इसका प्रभाव पूरे नालंदा जिले की सीटों पर पड़ सकता है।
निष्कर्ष: ‘घर की लड़ाई’ में नीतीश की साख दांव पर-
हरनौत में जदयू की इस बगावत ने बिहार की सियासत में नया भूचाल ला दिया है। अब सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि क्या नीतीश कुमार खुद हरनौत से मैदान में उतरेंगे,या फिर अपने क्षेत्र में उठे इस असंतोष को राजनीतिक प्रबंधन से शांत कर पाएंगे?
