
- डॉ अरुण कुमार मयंक –
पटना डेस्क। इंदिरा गाँधी इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेज (IGIMS) के नर्सिंग कॉलेज में शुक्रवार को उस वक्त जबरदस्त हंगामा मच गया, जब बीएससी नर्सिंग की सैकड़ों छात्राएं सड़क पर उतर आईं। छात्राओं ने कॉलेज प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए क्लास का बहिष्कार कर दिया और संस्थान के मेन गेट को जाम कर जोरदार प्रदर्शन शुरू कर दिया। पूरा कैंपस “तानाशाही बंद करो”, “स्टाइपेंड दो”, “मानसिक प्रताड़ना बंद करो” जैसे नारों से गूंज उठा। छात्राओं का आरोप है कि कॉलेज की प्राचार्य अनुजा डैनियल और उप प्राचार्य रूपा श्री दास लगातार उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रही हैं।
“आवाज उठाओ तो फेल कर देंगे…” छात्राओं का बड़ा आरोप
प्रदर्शन कर रही छात्राओं ने बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि छोटी-छोटी बातों पर गाली-गलौज की जाती है और विरोध करने पर परीक्षा में फेल करने की धमकी दी जाती है। एक छात्रा ने गुस्से में कहा— “हम लोग यहां पढ़ाई करने आते हैं लेकिन रोज मानसिक टॉर्चर झेलते हैं। विरोध करो तो कहते हैं करियर बर्बाद कर देंगे, फेल कर देंगे।” छात्राओं ने यह भी आरोप लगाया कि कई बार उन्हें जान से मारने तक की धमकी दी गई। यही वजह है कि अब छात्राएं खुलकर सड़क पर उतर आई हैं।
स्टाइपेंड घोटाले का आरोप! “13 हजार कहां जा रहा?”
आंदोलन कर रही छात्राओं ने कॉलेज प्रशासन पर स्टाइपेंड में गड़बड़ी का भी गंभीर आरोप लगाया है। छात्राओं का कहना है कि नर्सिंग स्टूडेंट्स को हर महीने 500 रुपये स्टाइपेंड और इंटर्नशिप के दौरान 13 हजार रुपये मिलने का प्रावधान है, लेकिन उन्हें यह राशि नहीं दी जा रही।
एक छात्रा ने सवाल उठाया—
“हमसे अस्पताल में ड्यूटी कराई जाती है, लेकिन मेहनताना तक नहीं मिलता। आखिर स्टाइपेंड का पैसा जा कहां रहा है?” अब छात्राएं पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग कर रही हैं।
“पंखा तक नहीं चलता…” हॉस्टल और क्लासरूम की बदहाली पर फूटा गुस्सा
नर्सिंग छात्राओं ने कॉलेज की बुनियादी सुविधाओं पर भी सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि हॉस्टल और क्लासरूम की हालत बेहद खराब है।
छात्राओं के मुताबिक—
कई कमरों में पंखे खराब हैं
बाथरूम गंदे रहते हैं
मेडिकल लीव नहीं दी जाती
शिकायत करने पर सुनवाई की बजाय डांट पड़ती है
छात्राओं ने आरोप लगाया कि तीन दिनों से आंदोलन जारी है, लेकिन कोई वरिष्ठ अधिकारी बात करने तक नहीं आया।
निदेशक पर भी आरोप, मिलने से किया इनकार!
प्रदर्शनकारी छात्राओं ने संस्थान के निदेशक डॉ. बिंदे कुमार पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। छात्राओं का कहना है कि वे अपनी शिकायत लेकर निदेशक से मिलने गई थीं, लेकिन उन्होंने मिलने से इनकार कर दिया। छात्राओं का आरोप है कि कॉलेज प्रशासन को ऊपर से संरक्षण मिल रहा है, इसलिए उनकी शिकायतों पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही।
मेन गेट जाम, मरीज परेशान… पुलिस पहुंची लेकिन छात्राएं डटी रहीं
छात्राओं ने IGIMS के मेन गेट के पास धरना दे दिया, जिससे अस्पताल आने-जाने वाले मरीजों और परिजनों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। स्थिति बिगड़ती देख पुलिस मौके पर पहुंची और छात्राओं को समझाने की कोशिश की, लेकिन देर शाम तक प्रदर्शन जारी रहा। छात्राएं अपनी मांगों पर अड़ी रहीं और साफ कहा कि जब तक प्राचार्य और उप प्राचार्य को हटाकर निष्पक्ष जांच नहीं होगी, आंदोलन जारी रहेगा।
“AIIMS जैसे नियम सिर्फ कागजों में…” छात्राओं का बड़ा हमला
एक छात्रा ने कॉलेज की पढ़ाई व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए कहा—
“यहां AIIMS जैसी व्यवस्था होने का दावा किया जाता है, लेकिन सच्चाई सिर्फ कागजों में है। समय पर परीक्षा नहीं होती, लगातार असाइनमेंट का दबाव रहता है और पढ़ाई के नाम पर सिर्फ काम लिया जाता है।”
IGIMS फिर विवादों में! पहले पेपर लीक, अब नर्सिंग छात्राओं का विद्रोह
IGIMS पहले भी परीक्षा अनियमितताओं और प्रशासनिक विवादों को लेकर सुर्खियों में रहा है। हाल के दिनों में MBBS परीक्षा में कथित गड़बड़ी और पेपर लीक के आरोपों ने संस्थान की छवि पर सवाल खड़े किए थे। अब नर्सिंग छात्राओं का यह उग्र आंदोलन प्रशासनिक व्यवस्था, छात्र सुविधाओं और संस्थान की कार्यशैली पर नए सवाल खड़े कर रहा है।
पंचमुखी न्यूज़ की बड़ी बात:
IGIMS की नर्सिंग छात्राओं का यह आंदोलन अब सिर्फ कॉलेज का मामला नहीं रह गया है। सवाल यह है कि अगर देश के बड़े मेडिकल संस्थानों में पढ़ने वाली छात्राएं खुद को असुरक्षित, अपमानित और शोषित महसूस करेंगी, तो स्वास्थ्य व्यवस्था का भविष्य कितना सुरक्षित रहेगा?
